बीबीएन, बीकानेर। पश्चिमी सीमा से सटे जिलों में रेल नेटवर्क को विस्तार देने की योजना अब राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से अहम मानी जा रही है। रेल मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित अनूपगढ़–खाजूवाला, जैसलमेर–बाड़मेर–भीलड़ी और खाजूवाला–जैसलमेर रेल परियोजनाएं न केवल दूरस्थ क्षेत्रों को जोड़ेंगी, बल्कि सेना की त्वरित तैनाती, रसद आपूर्ति और रणनीतिक पहुंच को भी मजबूत करेंगी। इन परियोजनाओं के तहत सैकड़ों किलोमीटर लंबी नई रेल लाइनों का निर्माण प्रस्तावित है, जिनमें से कुछ के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार हो चुकी है और स्वीकृति प्रक्रिया जारी है।
सरहद तक सीधी रेल पहुंच की तैयारी
राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती इलाके लंबे समय से सीमित रेल संपर्क के कारण विकास और सामरिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण रहे हैं। प्रस्तावित रेल लाइनें इन क्षेत्रों को सीधे राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ेंगी, जिससे सीमा तक पहुंच अधिक तेज़ और व्यवस्थित हो सकेगी। विशेष रूप से अनूपगढ़–खाजूवाला रेल लाइन, जो पाकिस्तान सीमा के नजदीक स्थित क्षेत्रों को जोड़ेगी, सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सेना की लॉजिस्टिक क्षमता में होगा इजाफा
नई रेल परियोजनाओं से सेना को सबसे बड़ा लाभ त्वरित मूवमेंट के रूप में मिलेगा। सैनिकों, भारी हथियारों और आवश्यक रसद को कम समय में सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सकेगा। जैसलमेर और बाड़मेर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में यह नेटवर्क एक वैकल्पिक और सुरक्षित आपूर्ति मार्ग प्रदान करेगा, जिससे आपात स्थिति में प्रतिक्रिया समय कम होगा।
समानांतर रणनीतिक कॉरिडोर का निर्माण
जैसलमेर–बाड़मेर–भीलड़ी और खाजूवाला–जैसलमेर रेल मार्ग पश्चिमी सीमा के साथ एक समानांतर रणनीतिक कॉरिडोर विकसित करेंगे। यह कॉरिडोर न केवल सैन्य दृष्टि से उपयोगी होगा, बल्कि सीमावर्ती चौकियों तक आवश्यक सामग्री और बलों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। इससे सुरक्षा तंत्र की समग्र क्षमता में वृद्धि होगी।
सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास को भी गति
इन परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर जैसे जिलों में व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही, सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होगी और लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलेगी।
केंद्र स्तर पर प्रक्रिया जारी
रेल मंत्रालय स्तर पर इन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। कुछ मार्गों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है, जबकि अन्य प्रस्तावों पर विचार चल रहा है। संसद में भी इन परियोजनाओं का उल्लेख किया जा चुका है, जिससे इनके जल्द आगे बढ़ने की संभावना बढ़ गई है।




