बीबीएन, नेटवर्क| भारतीय सेना ने मिलिट्री यूनिफॉर्म के दुरुपयोग और सुरक्षा जोखिमों को ध्यान में रखते हुए एक बार फिर कठोर एडवाइजरी जारी की है। सेना ने सभी कमांडों और फॉर्मेशंस से स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस्तेमाल हो चुकी कोई भी यूनिफॉर्म किसी निजी संस्था, नागरिक अथवा विक्रेता को रीसाइकलिंग, दान या बिक्री के उद्देश्य से न दी जाए।
सेना ने चेतावनी दी है कि स्थापित ड्रेस रेगुलेशंस 2018 का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई अनिवार्य रूप से की जाएगी। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि हाल के दिनों में कई गैर-सैन्य लोग आर्मी यूनिटों से संपर्क कर पुरानी यूनिफॉर्म मांगते पाए गए, जिनसे एक्सेसरीज़ या व्यावसायिक उत्पाद बनाने का प्रयास किया जा रहा था। यह प्रक्रिया सुरक्षा और सैन्य प्रतिष्ठा दोनों के लिए गंभीर खतरा मानी जा रही है।
● यूनिफॉर्म सेना की प्रतिष्ठा का प्रतीक
मुख्यालय के इक्विपमेंट मैनेजमेंट निदेशालय ने कहा है कि भारतीय सेना अपनी वर्दी को सम्मान, पहचान और संस्थागत गौरव का अटल प्रतीक मानती है। किसी भी तरह का दुरुपयोग मनोबल को कमजोर करता है।
● ग़लत हाथों में गई यूनिफॉर्म बन सकती है सुरक्षा जोखिम
सेना के मुताबिक दुश्मन देश, आतंकी समूह या आपराधिक तत्व सैन्य पहचान चुराने के लिए वर्दी का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
● नॉन-मिलिट्री लोगों द्वारा यूनिफॉर्म मांगने के मामले बढ़े
हाल में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं जहां निजी संस्थाओं ने पुरानी वर्दियाँ लेकर उन्हें एक्सेसरीज़ में बदलने की कोशिश की, जो नियमों का सीधे-सीधे उल्लंघन है।
● यूनिफॉर्म की IP सुरक्षा भी की गई है मजबूत
सेना ने डिजिटल कॉम्बैट यूनिफॉर्म (2022) और डिजिटल कोट कॉम्बैट यूनिफॉर्म (2025) के लिए इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IPR) हासिल किए हैं, जिससे इनके अनधिकृत उत्पादन या कॉपी को रोका जा सके।


