बीबीएन,बीकानेर। राजस्थान की पहचान और राज्य वृक्ष खेजड़ी सहित सभी 50 साल से पुराने पेड़ों को बचाने की मांग को लेकर बीकानेर में चल रहा आंदोलन गंभीर रूप ले चुका है। पर्यावरण संघर्ष समिति के बैनर तले 363 साधु-संत और पर्यावरण प्रेमी अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गए हैं। संतों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि जब तक ‘ट्री प्रोटेक्शन एक्ट’ लागू नहीं हो जाता और सरकार स्पष्ट आदेश जारी नहीं करती कि कोई भी पुराना पेड़ नहीं कटेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने अमृता देवी के बलिदान का स्मरण करते हुए कहा, “उन्होंने पेड़ बचाने के लिए सिर कटाए थे, हम कानून न बनने पर प्राण त्याग देंगे।”
आंदोलनकारियों की दो सूत्रीय मुख्य मांग है – पहली, सरकार तुरंत एक सख्त कानून बनाए जिसके तहत खेजड़ी समेत किसी भी 50 वर्ष पुराने पेड़ को किसी भी परियोजना में काटने की अनुमति न हो और पेड़ काटने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। दूसरी, पेड़ों के संरक्षण के मुद्दे पर सरकार द्वारा किसी निजी संस्था के साथ किया गया एमओयू (समझौता ज्ञापन) तत्काल रद्द किया जाए। संत सच्चिदानंद ने कहा, “सरकार नाजुक तरीके से मान रही है, इसलिए हमें कठोर तरीका अपनाना पड़ रहा है।”
इस आंदोलन को अब प्रमुख राजनीतिक हस्तियों का समर्थन भी मिलने लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सोशल मीडिया पर खेजड़ी की पूजा करते हुए फोटो साझा कर समर्थन जताया और कहा कि राजनीति से ऊपर उठकर इसे बचाना चाहिए। वहीं, कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी जल्द कानून बनाने की मांग को दोहराया। पूर्व मंत्री गोविंदराम मेघवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल चाहें तो आज ही विधानसभा में इस कानून की घोषणा कर सकते हैं। रात्रि विश्राम के लिए राजस्थान भर से आए सैकड़ों प्रदर्शनकारी स्थानीय धर्मशाला में नहीं समा रहे हैं, जिसके चलते कई लोगों ने टैंटों में या खुले आसमान के नीचे रात गुजारी। वहीं, प्रशासन ने भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कलेक्ट्रेट पर एसटीएफ की टुकड़ी तैनात कर दी है और आंदोलनकारियों से संपर्क बनाए रखा है।
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