बीबीएन,बीकानेर | बीकानेर में सार्वजनिक भूमि और पार्क को लेकर चल रहे एक विवाद में अदालत ने विकास प्राधिकरण के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है। अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश संख्या-3 ने स्पष्ट किया कि यह मामला सिविल कोर्ट के क्षेत्राधिकार में नहीं आता और विधिक प्रावधानों के तहत दायर याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। अदालत ने आदेश 7 नियम 11 के अंतर्गत वाद को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया। बीडीए की तरफ से पैरवी अधिवक्ता राजेश राजपुरोहित ने की।
याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाए गए थे कि आवासीय क्षेत्र में निर्धारित सार्वजनिक रास्ते और पार्क में अवैध हस्तक्षेप किया जा रहा है, जिससे आमजन की आवाजाही बाधित हो रही है। वहीं विकास प्राधिकरण ने अदालत में दलील दी कि विवादित भूमि नियोजन अधिनियम के अंतर्गत आती है और इस पर निर्णय लेने का अधिकार सक्षम प्राधिकरण को है, न कि सिविल न्यायालय को।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने माना कि मामला विधि द्वारा प्रतिबंधित श्रेणी में आता है। अदालत ने यह भी कहा कि सार्वजनिक उपयोग से जुड़ी भूमि से संबंधित मामलों में वैकल्पिक वैधानिक उपाय उपलब्ध हैं, जिनका पालन आवश्यक है। निर्णय के साथ ही विकास प्राधिकरण की स्थिति को वैधानिक मान्यता मिली।


