बीबीएन,बीकानेर। बीकानेर में सोमवार को खेजड़ी के पेड़ों की कटाई के विरोध में ‘खेजड़ी बचाओ आंदोलन’ के तहत हुए बंद एवं महापड़ाव ने ऐतिहासिक रूप ले लिया। शहर में व्यापक बंद रहा, जबकि महापड़ाव स्थल पर करीब एक लाख लोगों के जुटने और उनके लिए भोजन व्यवस्था की गई। विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सरकार को झुकाने के लिए बड़े आंदोलन की बात कही। वहीं, प्रशासनिक वार्ता विफल रहने के बाद प्रदर्शनकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर में डटे हुए हैं। आरोप है कि सोलर कंपनियां रात के अंधेरे में भी खेजड़ी के पेड़ काटकर दबा रही हैं।
बीकानेर में खेजड़ी बचाव आंदोलन का जनसैलाब सड़कों पर उमड़ पड़ा है। सोमवार को हुए बंद में व्यापारिक प्रतिष्ठान दोपहर दो बजे तक बंद रहे और शहरी स्कूलों में आधे दिन की छुट्टी दी गई। आंदोलन के समर्थन में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी महापड़ाव में शामिल हुए और उन्होंने सरकार को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि यदि बीकानेर से विधानसभा घेराव करना पड़ा तो वह सबसे आगे रहेंगे।
महापड़ाव में जनसमर्थन को देखते हुए आयोजकों ने लगभग एक लाख लोगों के लिए देशी घी का हलवा और छोले-भटूरे बनाने की विशाल व्यवस्था की। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन और तेज होगा। दिन भर चले महापड़ाव के बाद शाम को प्रदर्शनकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर में डट गए। इस दौरान संगरिया विधायक अभिमन्यु पूनिया, पोकरण विधायक प्रतापपुरी, बीजेपी नेता बिहारी लाल बिश्नोई सहित कई गणमान्य व्यक्ति भी समर्थन में मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से कलेक्टर नम्रता वृष्णि ने वार्ता के लिए पहुंची, लेकिन बातचीत विफल रही। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस-प्रशासन अलर्ट मोड पर है और आईजी हेमंत कुमार शर्मा व एसपी कावेंद्र सिंह सागर मौके पर मौजूद हैं।
आंदोलनकारियों का मुख्य आरोप है कि बीकानेर सहित पश्चिमी राजस्थान में सोलर प्रोजेक्ट्स के नाम पर बड़े पैमाने पर खेजड़ी के पेड़ों की अवैध कटाई की जा रही है। उनका कहना है कि कंपनियां रात के अंधेरे में पेड़ काटकर उन्हें जमीन में दबा देती हैं ताकि सबूत न बचे। आंदोलन की मांग है कि सोलर प्रोजेक्ट्स में पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और खेजड़ी की अवैध कटाई पर तत्काल प्रतिबंध लगे। इस आंदोलन के तहत पिछले एक महीने से कलेक्ट्रेट परिसर और करणीसर भाटियान में अनिश्चितकालीन धरना जारी है, जहां कई महिला प्रदर्शनकारियों की तबीयत बिगड़ने की सूचना भी मिली थी। बिश्नोई समाज की बैठक के बाद इस बंद की रूपरेखा तैयार की गई थी, जिसे बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल के समर्थन से व्यापक सफलता मिली।



