बीबीएन, नेटवर्क | भारतीय सेना की सप्त शक्ति कमान के अधीन अमोघ डिवीजन ने अबोहर सैन्य स्टेशन पर पूर्व सैनिक रैली और चिकित्सा शिविर का व्यापक आयोजन किया। कार्यक्रम में पंजाब के फाजिल्का, श्री मुक्तसर साहिब और फरीदकोट तथा राजस्थान के श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों से तीन हजार से अधिक पूर्व सैनिक, वीर नारियाँ, वीर माताएँ और उनके परिवारजन सम्मिलित हुए। आयोजन का उद्देश्य पूर्व सैनिक समुदाय से प्रत्यक्ष संवाद, कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी, स्वास्थ्य सेवाएँ और त्वरित सहायता उपलब्ध कराना रहा।
कार्यक्रम में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, कल्याणकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों तथा नागरिक प्रशासन के अधिकारियों की उपस्थिति रही। अधिकारियों ने पूर्व सैनिकों के हितों की समयबद्ध पूर्ति, लाभ वितरण की पारदर्शिता और समन्वित कल्याण व्यवस्था को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। आरंभिक चरण में विद्यार्थियों और सैन्य पाइप बैंड द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सैनिक जीवन के अनुशासन, त्याग और राष्ट्रनिर्माण में योगदान की भावनात्मक झलक प्रस्तुत की। इसके पश्चात विभिन्न रिकॉर्ड कार्यालयों, बैंकों, पुलिस इकाइयों, सूक्ष्म-लघु उद्योग संगठनों और सरकारी एजेंसियों ने हेल्प डेस्क स्थापित कर पेंशन, दस्तावेज़ अद्यतन, शिकायत निवारण तथा रोजगार संबंधी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया। साथ ही चिकित्सा शिविर में व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण और विशेषज्ञ परामर्श की सुविधा प्रदान की गई।
सैन्य कमान के वरिष्ठ अधिकारी ने अपने संबोधन में पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान, सहभागिता, सशक्तिकरण और समग्र देखभाल को निरंतर प्राथमिकता देने का आश्वासन दोहराया। समापन अवसर पर वीर नारियों, वीर माताओं और युद्ध में घायल पूर्व सैनिकों को राष्ट्रसेवा में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। दिव्यांग पूर्व सैनिकों को सहायक उपकरण—ई-स्कूटी, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, चलने की छड़ियाँ, रक्तचाप मापक यंत्र और ऑक्सीमीटर—प्रदान किए गए तथा आर्थिक सहायता भी दी गई।
पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों ने आयोजन को उपयोगी और प्रेरक बताते हुए सेना तथा प्रशासन के प्रति आभार प्रकट किया। उनके अनुसार ऐसे आयोजन न केवल पारस्परिक जुड़ाव को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि योजनाओं की जानकारी और प्रत्यक्ष सहायता प्राप्त करने का सशक्त माध्यम भी बनते हैं। यह रैली सेना और पूर्व सैनिक समुदाय के बीच अटूट संबंध, राष्ट्रीय कृतज्ञता और साझा दायित्व की भावना को पुनर्स्थापित करने वाला महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुई।



