सीमाओं से शहरों तक: आबकारी मामलों का बदलता नक्शा
बलजीत गिल.
बीबीएन, बीकानेर | बीकानेर रेंज में आबकारी अधिनियम से जुड़े मामलों का स्वरूप बीते तीन वर्षों में तेजी से बदला है। 2023 से 2025 (नवंबर तक) के आंकड़े बताते हैं कि जहां बीकानेर जिले में मामलों में लगातार गिरावट आई, वहीं चूरू में हर साल उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज हुई।
श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में स्थिति लगभग स्थिर रही, लेकिन कुल मिलाकर रेंज स्तर पर 2024 के बाद दबाव बढ़ा है। अवैध शराब की तस्करी, बिना लाइसेंस बिक्री और अंतरराज्यीय सप्लाई चेन इस बढ़ते ग्राफ की प्रमुख वजह मानी जा रही हैं। पुलिस के सामने नई तकनीकों और बदलते तस्करी तरीकों के कारण चुनौतियां भी बढ़ी हैं।
जिलेवार स्थिति: कहां कम, कहां ज्यादा दबाव
बीकानेर जिले में आबकारी मामलों की संख्या में लगातार कमी देखी गई है। प्रशासनिक स्तर पर इसे सीमावर्ती इलाकों में सतर्कता और स्थानीय नेटवर्क के कमजोर होने से जोड़ा जा रहा है। इसके उलट, चूरू जिले में मामलों की संख्या हर साल बढ़ती गई, जिसने रेंज के कुल आंकड़ों को ऊपर खींचा। श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में दर्ज मामलों की संख्या में बड़े उतार-चढ़ाव नहीं दिखे, लेकिन तस्करी के रूट्स सक्रिय बने रहे।
तस्करी के नए रास्ते, पुलिस की बढ़ती परीक्षा
अवैध शराब की तस्करी अब पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं है। खेतों, ढाबों और छोटे वाहनों के साथ-साथ अब ऑनलाइन ऑर्डर और डिलीवरी नेटवर्क का सहारा लिया जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्गों और ग्रामीण संपर्क मार्गों का इस्तेमाल कर खेप को एक जिले से दूसरे जिले तक पहुंचाया जा रहा है। रात के समय आवाजाही और सीमित संसाधनों के कारण पुलिस के लिए कार्रवाई कठिन हो जाती है।
अंतरराज्यीय कनेक्शन और नीति का असर
हरियाणा जैसे राज्यों से आने वाली शराब की सप्लाई ने बीकानेर रेंज को एक ट्रांजिट ज़ोन बना दिया है। कीमतों और नीतिगत बदलावों का सीधा असर तस्करी पर पड़ा है। रेंज में पकड़ी गई कई बड़ी खेपों ने यह साफ किया है कि सप्लाई चेन संगठित है और इसके तार कई जिलों से जुड़े हैं।
आकाओं तक क्यों नहीं पहुंच पा रही पुलिस?
तस्करी के सरगनाओं तक पहुंचने में सबसे बड़ी बाधा नेटवर्क का विकेंद्रीकरण है। छोटे-छोटे कैरियर, डिजिटल भुगतान, और अस्थायी रूट्स जांच को जटिल बना देते हैं। तकनीकी संसाधनों की सीमित उपलब्धता और जमीनी स्तर पर मिलीभगत की आशंका भी जांच की गति को प्रभावित करती है। पुलिस का कहना है कि चेकपोस्ट, गश्त और खुफिया तंत्र को मजबूत किया जा रहा है।
पुलिस के पास विकल्प
कई वरिष्ठ ओर रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों का सुझाव है कि ड्रोन निगरानी, डेटा एनालिटिक्स और अंतरराज्यीय समन्वय से ही इस नेटवर्क पर प्रभावी प्रहार संभव है। साथ ही, स्थानीय स्तर पर जागरूकता और त्वरित कानूनी कार्रवाई से मामलों की संख्या पर अंकुश लगाया जा सकता है।






