बीबीएन, नेटवर्क । भारत की समुद्री सुरक्षा और सामरिक क्षमता को बड़ा बल मिलने जा रहा है। स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी INS Aridhaman की तैनाती और अत्याधुनिक युद्धपोत INS Taragiri के बेड़े में शामिल होने से भारतीय नौसेना की ताकत कई गुना बढ़ेगी। यह दोनों प्लेटफॉर्म न केवल भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करेंगे, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच देश की रणनीतिक पकड़ को भी सुदृढ़ करेंगे। स्वदेशी तकनीक पर आधारित ये उपलब्धियां आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।
परमाणु त्रिआयामी क्षमता को नई मजबूती
INS अरिदमन के शामिल होने से भारत की न्यूक्लियर ट्रायड (थल, जल और वायु से परमाणु हमला करने की क्षमता) और अधिक सशक्त होगी। यह पनडुब्बी समुद्र के भीतर से जवाबी परमाणु प्रहार (Second-Strike Capability) सुनिश्चित करती है, जो किसी भी परमाणु नीति का मूल आधार होती है। इससे भारत की ‘नो-फर्स्ट-यूज’ नीति को विश्वसनीयता मिलती है।
समुद्र में लगातार रणनीतिक निगरानी संभव
अरिहंत-श्रेणी की तीसरी पनडुब्बी के रूप में अरिदमन के जुड़ने से अब भारतीय नौसेना समुद्र में निरंतर निगरानी बनाए रखने में सक्षम होगी। इससे संभावित खतरों पर पहले से नजर रखी जा सकेगी और प्रतिक्रिया समय भी कम होगा।
हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ेगा दबदबा
बढ़ते क्षेत्रीय तनावों के बीच यह पनडुब्बी भारत के सुरक्षा दायरे को विस्तार देगी। चीन और पाकिस्तान की समुद्री गतिविधियों के बीच भारत की उपस्थिति अधिक प्रभावी और संतुलित बनेगी।
आत्मनिर्भर भारत को बड़ी बढ़त
अरिदमन लगभग 90 प्रतिशत स्वदेशी तकनीक से निर्मित है। इसका निर्माण एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वेसल (ATV) परियोजना के तहत किया गया है। यह भारत की जटिल रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता और इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाता है। प्रोजेक्ट 17A के तहत विकसित INS तारागिरी भारतीय नौसेना के आधुनिक बेड़े में अहम भूमिका निभाएगा। इसकी डिजाइन ऐसी है कि यह रडार पर कम दिखाई देता है, जिससे युद्ध के दौरान इसकी सुरक्षा बढ़ जाती है। तारागिरी में उन्नत मिसाइल सिस्टम, पनडुब्बी रोधी तकनीक और आधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली लगी है। यह पोत समुद्री युद्ध के साथ-साथ ह्यूमैनिटेरियन सहायता और आपदा राहत अभियानों में भी उपयोगी साबित होगा।
स्वदेशी निर्माण से आर्थिक मजबूती
यह युद्धपोत 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से बना है, जिसमें सैकड़ों MSME शामिल हैं। इससे न केवल रक्षा क्षेत्र मजबूत हुआ है, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।
नौसेना के आधुनिकीकरण को गति
INS अरिदमन और INS तारागिरी का शामिल होना भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम है। इससे भारत की समुद्री शक्ति वैश्विक स्तर पर और प्रभावशाली बनेगी।




