बीबीएन, नेटवर्क। भारतीय सेना में अहम नेतृत्व परिवर्तन के तहत लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने 1 अप्रैल 2026 को दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पदभार ग्रहण कर लिया। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का स्थान लिया है, जिन्होंने इसी दिन उप सेना प्रमुख के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली। कार्यभार ग्रहण करते ही संदीप जैन ने युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और मुख्यालय में गार्ड ऑफ ऑनर प्राप्त किया।
चार दशकों का अनुभव, कई अहम अभियानों का नेतृत्व
लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन का सैन्य करियर लगभग 40 वर्षों का रहा है। जून 1988 में महार रेजिमेंट में कमीशन प्राप्त करने के बाद उन्होंने देश और विदेश में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने अर्द्ध-विकसित क्षेत्रों में ऑपरेशनल कमान के साथ-साथ दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन के दौरान एक इन्फैंट्री बटालियन का नेतृत्व किया। इसके अतिरिक्त स्ट्राइक कोर में इन्फैंट्री ब्रिगेड, काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स और उत्तरी कमान में पिवट कोर की कमान संभालते हुए व्यापक रणनीतिक अनुभव अर्जित किया। उनकी सेवा में ऑपरेशन पवन में भागीदारी, इथियोपिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन में सैन्य पर्यवेक्षक की भूमिका और नियंत्रण रेखा व पूर्वोत्तर क्षेत्रों में उच्च ऊंचाई तथा काउंटर इंसर्जेंसी अभियानों का लंबा अनुभव शामिल है।
रणनीतिक सोच और आधुनिकीकरण पर विशेष जोर
दक्षिणी कमान का दायित्व संभालने से पहले वे इसी कमान के मुख्यालय में चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में कार्यरत थे। इस दौरान उन्होंने बल संरचना में सुधार, क्षमता विकास और संचालनात्मक तैयारियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि कमान के अंतर्गत आने वाले विविध क्षेत्रों—रेगिस्तान, रण, क्रीक, तटीय, द्वीपीय और भीतरी इलाकों—में उच्च स्तर की सैन्य तत्परता बनाए रखना प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने JAI (Jointness, Atmanirbharta and Innovation) ढांचे पर बल देते हुए संयुक्त संचालन, स्वदेशी रक्षा क्षमता और आधुनिक तकनीक के समावेशन को आगे बढ़ाने की बात कही।
उच्च स्तरीय सैन्य प्रशिक्षण और सम्मान
लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने आर्मी वार कॉलेज से हायर कमांड कोर्स तथा केन्या से नेशनल डिफेंस कोर्स किया है। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और सेना मेडल (SM) से सम्मानित किया जा चुका है।
बदलती चुनौतियों के बीच तैयार रहेगी सेना
अपने संबोधन में उन्होंने सभी रैंकों को निर्देशित किया कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप उच्च स्तर की पेशेवर क्षमता, अनुशासन और युद्धक तत्परता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और समन्वित सैन्य दृष्टिकोण ही भविष्य की चुनौतियों से निपटने की कुंजी होगा।



