बीबीएन नेटवर्क। जयपुर सैन्य स्टेशन स्थित सप्त शक्ति ऑडिटोरियम में गुरुवार को जनरल के. सुंदरजी मेमोरियल लेक्चर के छठे संस्करण का आयोजन किया गया, जिसमें तेजी से बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच भारत की रणनीतिक स्वायत्तता, राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री सेंटर एंड स्कूल (MIC&S) और सेंटर फॉर लैंड वॉरफेयर स्टडीज (CLAWS) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, कूटनीतिज्ञों और रणनीतिक विशेषज्ञों ने भाग लिया और समकालीन चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए।
लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने अपने मुख्य संबोधन में कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य भू-राजनीतिक अस्थिरता, महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा, भू-आर्थिक विखंडन और तकनीकी बदलावों से प्रभावित है, ऐसे में रणनीतिक स्वायत्तता अब केवल कूटनीतिक अवधारणा नहीं, बल्कि राष्ट्र की संप्रभुता, सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक आधार बन चुकी है। कार्यक्रम में पूर्व सेना प्रमुख जनरल कृष्णस्वामी सुंदरजी के योगदानों को स्मरण करते हुए उनके सैन्य आधुनिकीकरण, तकनीकी नवाचार और संस्थागत सुधारों की विरासत को रेखांकित किया गया, जिसे आज भी भारतीय रक्षा रणनीति का मार्गदर्शक माना जाता है।
सेमिनार में पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज सरन और यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया के महानिदेशक वाइस एडमिरल संजय जसजीत सिंह सहित कई विशेषज्ञों ने भाग लेते हुए बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में भारत की विदेश नीति के पुनर्संतुलन, उभरती प्रौद्योगिकियों के प्रभाव, रक्षा तैयारियों, स्वदेशीकरण, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा और आर्थिक लचीलेपन जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक, साइबर सुरक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और आपूर्ति श्रृंखलाओं में आत्मनिर्भरता विकसित करना समय की आवश्यकता है तथा बिना रणनीतिक निर्भरता के वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री सेंटर एंड स्कूल की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया, जिसे भारतीय सेना के आधुनिक प्रशिक्षण संस्थानों में अग्रणी माना जाता है और जो मशीनीकृत युद्धक रणनीति तथा इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र है। अंत में यह निष्कर्ष सामने आया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने के लिए बहुआयामी और संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा, और इस आयोजन ने नीति-निर्माताओं व सैन्य विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान कर भविष्य की सुरक्षा रणनीतियों के लिए स्पष्ट दिशा निर्धारित की।



