⭕ मूलवास-सीलवा में धर्मध्वजा स्थापना, साधु-संतों की मौजूदगी
⭕ शिक्षा और संस्कृति पर हमलों का उल्लेख, स्वर्णिम भारत का आह्वान
बीबीएन,बीकानेर। हरिभाऊ बागडे ने नोखा क्षेत्र के मूलवास-सीलवा में आयोजित विराट हिंदू धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सनातन धर्म विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा है, जिसे संरक्षित और संवर्धित रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। कार्यक्रम में देश के विभिन्न पीठों से आए संतों की उपस्थिति रही तथा मां भारती प्रतिरूप और धर्मध्वजा स्थापना का लोकार्पण भी किया गया। राज्यपाल ने शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता के प्रश्नों को जोड़ते हुए स्वर्णिम भारत की पुनर्स्थापना का आह्वान किया।
धर्म और संस्कृति की निरंतरता पर बल
राज्यपाल ने कहा कि सनातन परंपरा हजारों वर्षों से भारतीय जीवन का आधार रही है। यह केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि जीवन पद्धति है, जो समस्त जीवों के प्रति करुणा और सह-अस्तित्व का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर बाहरी आक्रमणों और वैचारिक चुनौतियों के बावजूद यह परंपरा और अधिक सशक्त होकर उभरी है।
उन्होंने प्राचीन शिक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय ज्ञान के वैश्विक केंद्र थे। गांव-गांव में संचालित गुरुकुल व्यक्ति निर्माण की सुदृढ़ व्यवस्था थे। उनके अनुसार औपनिवेशिक काल में भारतीय शिक्षा प्रणाली को कमजोर करने के प्रयास किए गए, जिसके दीर्घकालिक प्रभाव आज भी दिखाई देते हैं।
सांस्कृतिक क्षरण पर चिंता
राज्यपाल ने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में समाज अपनी जड़ों से दूर होता जा रहा है। उन्होंने इसे चिंताजनक बताते हुए कहा कि सांस्कृतिक क्षरण को रोकना समय की आवश्यकता है। यदि देश को पुनः वैभव के शिखर पर पहुंचाना है तो आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को केंद्र में रखना होगा।
संत समाज की उपस्थिति
कार्यक्रम में साध्वी ऋतंभरा, सीथल पीठाधीश्वर क्षमाराम महाराज, श्रीबालाजी धाम के बजरंग दास, हनुमानगढ़ी (अयोध्या) के राजू दास महाराज, कुशाल गिरि महाराज, प्रताप पुरी महाराज, सरजूदास महाराज, स्वामी विमर्शानंद तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक निंबाराम सहित संत समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे । स्वागत उद्बोधन नरसी कुलरिया ने दिया। आयोजन में विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के अध्यक्ष रामगोपाल सुथार, भंवर कुलरिया, पूनम कुलरिया सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
मां भारती प्रतिरूप और धर्मध्वजा स्थापना
धर्मसभा से पूर्व नरसी विला के मुख्य द्वार पर मां भारती प्रतिरूप और धर्मध्वजा स्थापना का लोकार्पण किया गया। यह स्थापना रामप्यारी देवी की प्रेरणा से की गई बताई गई। इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे।




