बीबीएन,बीकानेर। शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ का समापन रविवार को श्रद्धा, भक्ति और वैदिक अनुष्ठानों के साथ हुआ। अंतिम दिन वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ में पूर्णाहुतियां दी गईं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने राष्ट्र कल्याण, सामाजिक सद्भाव तथा परिवारों की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। आयोजन में महिलाओं, युवाओं और बच्चों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। कार्यक्रम के समापन अवसर पर यज्ञ कुंडों में गाय के घी और हवन सामग्री से आहुतियां दी गईं, जिससे वातावरण सुगंधित और पवित्र बना रहा। अनुष्ठान के अंत में देवताओं के विसर्जन और पुनः आगमन की प्रार्थना की गई।
दीप यज्ञ में महिलाओं ने किया विश्व कल्याण का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान पूर्व संध्या पर प्रज्ञा पुराण के पाठ के बाद दीप यज्ञ का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने अपनी थालियों में पांच दीपक प्रज्वलित कर गायत्री मंत्र के उच्चारण के साथ अपने स्वास्थ्य, परिवार की मंगलकामना और विश्व शांति के लिए प्रार्थना की। दीपों की सामूहिक ज्योति और वैदिक मंत्रों की ध्वनि से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत दिखाई दिया।
वैदिक परंपरा के अनुसार हुए संस्कार
आयोजन के चौथे दिन विभिन्न वैदिक संस्कार भी संपन्न कराए गए। इस दौरान एक दंपत्ति का वैदिक विधि-विधान के साथ विवाह संस्कार कराया गया। मंत्रोच्चार और सात फेरों के माध्यम से उन्हें दांपत्य जीवन के आदर्शों और पारिवारिक मूल्यों की प्रेरणा दी गई इसके साथ ही तीन महिलाओं का पुंसवन संस्कार संपन्न कराया गया, जिसमें गर्भस्थ शिशु के उज्ज्वल, संस्कारित और सद्गुणी बनने की कामना के साथ विशेष वैदिक अनुष्ठान किया गया। इसके अतिरिक्त दो श्रद्धालुओं को गुरु दीक्षा संस्कार प्रदान किया गया। दीक्षा के माध्यम से उन्हें साधना, आध्यात्मिक अनुशासन और गायत्री उपासना के मार्ग पर चलने का संकल्प दिलाया गया।
समाज जागरण और नैतिक मूल्यों का संदेश
आयोजन से जुड़े वक्ताओं ने कहा कि गायत्री यज्ञ और वैदिक संस्कार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज में नैतिकता, सदाचार और जागरूकता को बढ़ावा देने का माध्यम हैं। ऐसे कार्यक्रम व्यक्ति के जीवन में संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का विकास करते हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया और समाज में नैतिक मूल्यों, सद्भाव और सकारात्मक जीवन दृष्टि के प्रसार का संदेश दिया गया।



