बीबीएन, नेटवर्क | राज्य की कानून-व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और निरीक्षक स्तर पर लंबे समय से बनी कमी को दूर करने के उद्देश्य से राजस्थान पुलिस ने प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव लागू करने का निर्णय लिया है। नए निर्देशों के अनुसार कम अपराध दर वाले और अपेक्षाकृत शांत क्षेत्रों के कुछ थानों की जिम्मेदारी अनुभवी उपनिरीक्षकों को सौंपी जाएगी, जबकि संवेदनशील तथा उच्च अपराध दर वाले थानों पर वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति यथावत रखी जाएगी। यह निर्णय महानिदेशक राजीव शर्मा के आदेशों के बाद प्रभावी माना जा रहा है।
किन थानों पर लागू होगी नई व्यवस्था
विभागीय मानकों के अनुसार यह व्यवस्था केवल उन थानों तक सीमित रहेगी जहाँ वर्षभर में दर्ज आपराधिक मामलों की संख्या निर्धारित सीमा से कम रहती है और जो जिला या उपखंड मुख्यालयों से बाहर स्थित हैं। ऐसे स्थानों पर आवश्यक अनुभव रखने वाले उपनिरीक्षक को थाना प्रभारी की जिम्मेदारी दी जा सकेगी। साथ ही कानून-व्यवस्था की स्थिति की नियमित समीक्षा जारी रहेगी, ताकि अपराध दर बढ़ने या परिस्थितियाँ संवेदनशील होने पर वरिष्ठ अधिकारी की तैनाती तुरंत की जा सके।
संसाधन प्रबंधन और नेतृत्व विकास पर जोर
पुलिस मुख्यालय का आकलन है कि निरीक्षक स्तर के रिक्त पदों और प्रशासनिक दबाव के बीच यह कदम व्यावहारिक संतुलन स्थापित करेगा। इससे एक ओर उपलब्ध मानव संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा, वहीं दूसरी ओर कनिष्ठ अधिकारियों को नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर भी मिलेगा। विशेष रूप से ग्रामीण और कम अपराध वाले क्षेत्रों में संचालन संबंधी चुनौतियों को कम करने में यह व्यवस्था सहायक मानी जा रही है।
अनुभव को बनाया गया प्रमुख आधार
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि थाना प्रभारी की जिम्मेदारी केवल उन्हीं उपनिरीक्षकों को दी जाएगी जिनके पास न्यूनतम निर्धारित अवधि का सक्रिय फील्ड अनुभव हो। विभाग का मानना है कि पर्याप्त सेवा-अनुभव रखने वाले अधिकारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने, मामलों की जांच करने और स्थानीय सामाजिक परिस्थितियों को समझने में सक्षम होते हैं।
दीर्घकालिक समाधान की दिशा
विशेषज्ञों के अनुसार स्थायी समाधान के लिए रिक्त पदों पर नियमित भर्ती और पदोन्नति प्रक्रिया को गति देना आवश्यक होगा, किंतु वर्तमान परिस्थितियों में यह कदम प्रशासनिक लचीलेपन और संसाधन संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजधानी जयपुर सहित विभिन्न जिलों में निरीक्षक स्तर की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी, जिसके कारण यह अंतरिम व्यवस्था लागू की गई है। कुल मिलाकर यह निर्णय पुलिस तंत्र की कार्यकुशलता बनाए रखने, उपलब्ध बल का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करने और भविष्य के नेतृत्व को तैयार करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रशासनिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।


