बीबीएन, बीकानेर। सीमावर्ती जिले बीकानेर में राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंधमारी की एक गंभीर कोशिश का पर्दाफाश हुआ है। शहर के सादुल गंज स्थित सैन्य प्रतिष्ठान के बेहद करीब एक संदिग्ध सुरंग मिलने से हड़कंप मच गया है। मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) की तत्परता से उजागर हुई इस 10 फुट लंबी सुरंग ने सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय जासूसी नेटवर्क की ओर इशारा किया है। प्रारंभिक जांच में मौके से तकनीकी उपकरण बरामद किए गए हैं, जिसके बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और सीआईडी सहित तमाम एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
साजिश के पुख्ता प्रमाण
सूत्रों के अनुसार, सादुल गंज इलाके में कुछ संदिग्ध गतिविधियों की खुफिया सूचना मिलने के बाद सैन्य अधिकारियों ने गहन निरीक्षण किया था। डूंगर कॉलेज के पीछे स्थित रेतीले भूखंड में जब जांच की गई, तो जमीन के नीचे दबी यह सुरंगनुमा संरचना मिली। सुरंग के भीतर से संचार सुनने वाले हेडफोन, बिजली के तार और अन्य इलेक्ट्रॉनिक यंत्र बरामद हुए हैं। विशेषज्ञों का मत है कि इन उपकरणों का इस्तेमाल सैन्य सिग्नल पकड़ने या गुप्त निगरानी के लिए किया जा रहा था।
हालिया मौजूदगी के संकेत
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि सुरंग के अंदर 23 मार्च के समाचार पत्र में लिपटी चार रोटियां मिली हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि सुरक्षा एजेंसियों की दबिश से कुछ समय पहले तक यहां कोई मौजूद था। रेतीले इलाके में इस तरह की सुरंग का निर्माण और उसमें आधुनिक उपकरणों की मौजूदगी किसी बड़ी साजिश या अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क से जुड़ाव की ओर संकेत करती है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे ‘मल्टी-एजेंसी इन्वेस्टिगेशन’ के दायरे में रखा गया है। पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने साक्ष्य जुटाए हैं। बरामद उपकरणों की तकनीकी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका डेटा कहां भेजा जा रहा था।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दुश्मन तत्वों द्वारा पारंपरिक घुसपैठ के बजाय ‘अंडरग्राउंड’ रास्तों का उपयोग करना सामरिक सुरक्षा के लिए नई और गंभीर चुनौती है।




