बीबीएन, नेटवर्क। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को जयपुर में आयोजित संयुक्त कमांडरों के द्वितीय सम्मेलन में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को भारतीय सेनाओं की सबसे प्रभावशाली और सटीक सैन्य कार्रवाइयों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल सैन्य सफलता नहीं, बल्कि भारत की नई रणनीतिक सोच, मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और तीनों सेनाओं के बेहतरीन तालमेल का प्रतीक है। रक्षा मंत्री ने साफ कहा कि इस ऑपरेशन ने दुश्मन को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर कर दिया और दुनिया को भारत की सैन्य क्षमता का एहसास कराया।
रक्षा मंत्री ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और युद्ध का स्वरूप भी पूरी तरह बदल चुका है। आने वाले समय में लड़ाइयां केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि साइबर स्पेस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा नेटवर्क, अंतरिक्ष और सूचना युद्ध के मोर्चों पर भी लड़ी जाएंगी। ऐसे में भारतीय सेनाओं को तकनीकी रूप से और अधिक मजबूत बनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धों में वही देश आगे रहेगा, जिसके पास अत्याधुनिक तकनीक, तेज निर्णय क्षमता और मजबूत संयुक्त सैन्य ढांचा होगा। राजनाथ सिंह ने थलसेना, वायुसेना और नौसेना के बीच बढ़ते समन्वय की सराहना करते हुए कहा कि अब भारत की सैन्य रणनीति संयुक्त अभियान और तकनीकी श्रेष्ठता पर आधारित है रक्षा मंत्री ने सैन्य कमांडरों को दुश्मनों के लिए हमेशा अप्रत्याशित बने रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सेना को ऐसी रणनीति अपनानी चाहिए जिससे हर परिस्थिति में भारत को सामरिक बढ़त मिले। साथ ही उन्होंने चेताया कि दुश्मन की चालों को समझकर उससे दो कदम आगे रहना ही आधुनिक युद्ध की असली ताकत है।
सम्मेलन के दौरान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर आधारित एक विशेष डॉक्यूमेंट्री भी जारी की गई। इसके अलावा ‘विजन 2047’ का हिंदी संस्करण और संयुक्त संचार प्रणाली से जुड़े नए सैन्य सिद्धांत दस्तावेज भी लॉन्च किए गए। इनका उद्देश्य भविष्य के बहुक्षेत्रीय अभियानों में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और तेज संचार व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
‘मिलिट्री केपेबिलिटी इन न्यू डोमेन्स’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में भविष्य के युद्ध, साइबर सुरक्षा, क्वांटम तकनीक, एआई आधारित खतरों और स्वदेशी सैन्य नवाचारों पर विस्तार से चर्चा हुई। सम्मेलन में आधुनिक खुफिया तंत्र, परिचालन योजना और सूचना प्रबंधन से जुड़ी नई तकनीकों का प्रदर्शन भी किया गया। कार्यक्रम में सीडीएस जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी, सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह, डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत समेत कई वरिष्ठ सैन्य और रक्षा अधिकारी मौजूद रहे।



