बीबीएन, नेटवर्क। पूर्वी लद्दाख के संवेदनशील इलाके में भारतीय सेना का एक चीता हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसा श्योक नदी के समीप पहाड़ी क्षेत्र में हुआ, जहां हेलिकॉप्टर अचानक नियंत्रण खोकर चट्टानी इलाके में जा गिरा। दुर्घटना के समय हेलिकॉप्टर में एक डिविजन कमांडर स्तर के अधिकारी और दो पायलट सवार थे। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी की जान नहीं गई। वरिष्ठ सैन्य अधिकारी पूरी तरह सुरक्षित बताए जा रहे हैं, जबकि दोनों पायलटों को मामूली चोटें आई हैं।
सूत्रों के अनुसार दुर्घटना के तुरंत बाद सेना की बचाव टीम सक्रिय हो गई और करीब 15 से 20 मिनट के भीतर सभी को सुरक्षित निकालकर लेह पहुंचाया गया। हादसे के समय मौसम साफ बताया जा रहा है, इसलिए तकनीकी खराबी या अन्य कारणों को लेकर जांच शुरू कर दी गई है। सेना ने पूरे मामले की विस्तृत इन्क्वायरी के आदेश दे दिए हैं।
पहाड़ी इलाके में हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक हेलिकॉप्टर नियमित सैन्य उड़ान पर था। उड़ान के दौरान यह अचानक असंतुलित होकर पहाड़ी क्षेत्र में जा गिरा। दुर्घटना की तस्वीरें सामने आने के बाद हादसे की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा रहा है। हेलिकॉप्टर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन उसमें सवार सभी लोगों का सुरक्षित बच निकलना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा।
पुराने हेलिकॉप्टरों की सुरक्षा पर फिर बहस
चीता हेलिकॉप्टर भारतीय सेना के सबसे पुराने हेलिकॉप्टर बेड़े में शामिल हैं। सेना लंबे समय से इनका उपयोग दुर्गम और ऊंचाई वाले इलाकों में रसद पहुंचाने तथा सैनिक गतिविधियों के लिए करती रही है। वर्तमान में सेना के पास चीता, चेतक और चीतल श्रेणी के करीब 190 हेलिकॉप्टर हैं। इनमें कई हेलिकॉप्टर 30 से 50 वर्ष पुराने बताए जाते हैं, जबकि कुछ की सेवा अवधि 50 वर्ष से भी अधिक हो चुकी है। इस दुर्घटना के बाद एक बार फिर पुराने सैन्य हेलिकॉप्टरों की परिचालन सुरक्षा और आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर सवाल उठने लगे हैं।
सेना ने शुरू की तकनीकी जांच
रक्षा सूत्रों का कहना है कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की टीम गठित की गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा तकनीकी खराबी, मानवीय त्रुटि या किसी अन्य वजह से हुआ।



