बीबीएन, नेटवर्क, 4 सितंबर। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय और सीमा सुरक्षा बल (BSF) को नोटिस जारी किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वरिष्ठ पुलिस और केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों के अफसर अपने आवासों पर निजी कामकाज के लिए जवानों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता, जो बीएसएफ में वर्तमान में डीआईजी पद पर कार्यरत हैं, ने दावा किया है कि जवानों को सीमा और कानून-व्यवस्था की ड्यूटी से हटाकर अफसरों के घरेलू कार्यों, यहां तक कि कुत्तों की देखरेख तक के लिए लगाया जाता है। याचिका में इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए गंभीर खतरा बताया गया है, क्योंकि असम राइफल्स और सीआरपीएफ जैसे बलों में हजारों पद पहले से ही खाली हैं।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने केंद्र और बीएसएफ को मामले पर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने इस पर सुनवाई की अगली तारीख जनवरी 2026 तय की है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि इस समस्या को पहले भी रेखांकित किया गया था। 2016 में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने सभी राज्यों और केंद्रीय बलों को एक आदेश जारी कर स्पष्ट कहा था कि आवासीय परिसरों में तैनात जवानों, वाहनों और अन्य सुरक्षा सुविधाओं का दुरुपयोग न हो। यहां तक कि सेवानिवृत्त अफसरों के घरों में भी जवानों की तैनाती न की जाए।
इसके बावजूद, याचिका में दावा किया गया है कि कई अफसर इस प्रथा को अनदेखा कर जवानों को बिना अनुमति निजी कामों में लगाते रहे हैं। बीएसएफ ने भी इस सिलसिले में 131 मामलों की सूची तैयार की थी, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अदालत ने इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है और जवानों के दुरुपयोग पर गहन जांच की मांग को गंभीरता से लिया है।
—


