बीबीएन, नेटवर्क, 29 जुलाई। सरहद की निगरानी अब और चौकस होगी। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को लगभग 5,000 बॉडी वॉर्न कैमरे उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे जवानों की तैनाती के दौरान की हर गतिविधि अब कैमरे में दर्ज होगी। इन कैमरों से न केवल सीमा पार अपराधों पर नजर रखी जा सकेगी, बल्कि अवैध घुसपैठ के मामलों में साक्ष्य भी जुटाए जा सकेंगे। पहले चरण में ये कैमरे भारत बांग्लादेश बॉर्डर पर लगाए जाएंगे और दूसरे चरण में पश्चिमी सीमा की कुछ संवेदनशील चौकियों पर इसे लगाया जाएगा।
दो चरणों में लगेंगे कैमरे
बीएसएफ के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, ये कैमरे दो चरणों में भेजे जा रहे हैं। इन्हें जवान अपनी वर्दी या हेल्मेट पर लगा सकेंगे। कैमरे रात में भी साफ फुटेज रिकॉर्ड करने में सक्षम हैं और करीब 12 से 14 घंटे की रिकॉर्डिंग कर सकते हैं। यह निर्णय केंद्र सरकार द्वारा हाल में की गई एक समीक्षा बैठक के बाद लिया गया है।
चुनिंदा बीओपी होगी बायोमेट्रिक उपकरणों से लैस
सूत्रों के अनुसार, बॉर्डर पर कुछ चुनिंदा बीओपी (सीमा चौकियों) को बायोमेट्रिक उपकरणों से भी लैस किया जा रहा है। इन उपकरणों की मदद से अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वालों के अंगुलियों के निशान और आंखों की पुतलियों की स्कैनिंग की जा सकेगी। यह डाटा विदेशी पंजीकरण कार्यालय (एफआरओ) के साथ साझा किया जाएगा।
गौरतलब है कि 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद से भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थिति को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा हाल ही में की गई एक ‘व्यापक समीक्षा’ के बाद इन दो प्रमुख प्रस्तावों को बीएसएफ के लिए मंजूरी दी गई है।
मुठभेड़ की परिस्थिति में होंगे कारगर
बीएसएफ सूत्रों के मुताबिक, कैमरे उन हालातों में भी मददगार होंगे, जब जवानों को मवेशी तस्करों, मानव तस्करों या जाली नोटों की तस्करी में लिप्त अपराधियों से मुठभेड़ करनी पड़ती है। साथ ही, यह रिकॉर्डिंग उन आरोपों या हमलों के खिलाफ भी रक्षा करेगी, जो सीमा पर तैनात जवानों पर अक्सर लगाए जाते हैं।