⭕ दिल्ली से कोलकाता तक सैन्य ठिकानों का नामकरण स्वदेशी नायकों के नाम
बीबीएन, नेटवर्क। भारतीय सेना ने देशभर में अपने सैन्य प्रतिष्ठानों, कैंटोनमेंट क्षेत्रों और प्रमुख सुविधाओं से जुड़े 246 औपनिवेशिक नामों को बदलकर उन्हें भारतीय वीरों, युद्ध नायकों और सम्मानित सैन्य अधिकारियों के नाम समर्पित कर दिया है। इस व्यापक पहल का उद्देश्य ब्रिटिश शासन की स्मृतियों से जुड़ी पहचान को समाप्त करते हुए राष्ट्रीय गौरव, सैन्य परंपरा और शौर्यगाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है। दिल्ली, कोलकाता, मथुरा, अंबाला, जयपुर, देहरादून, पूर्वोत्तर क्षेत्र, बरेली और महू सहित कई सैन्य ठिकानों पर यह बदलाव लागू किया गया है। यह कदम राष्ट्रीय स्वाभिमान को सुदृढ़ करने और स्वतंत्र भारत की सैन्य विरासत को प्रमुखता देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दिल्ली और कोलकाता में प्रतीकात्मक परिवर्तन
दिल्ली कैंट की प्रसिद्ध माल रोड अब अरुण खेत्रपाल मार्ग के नाम से जानी जाएगी, जो 1971 युद्ध के परमवीर चक्र विजेता युवा अधिकारी की वीरता को स्मरण कराती है। अधिकारियों के आवासीय क्षेत्र कर्बी प्लेस का नाम बदलकर केनुगुरुसे विहार रखा गया है, जो कारगिल युद्ध के महावीर चक्र विजेता को समर्पित है कोलकाता स्थित ऐतिहासिक फोर्ट विलियम, जो कभी ब्रिटिश सत्ता का प्रमुख केंद्र था, अब विजय दुर्ग कहलाएगा—यह परिवर्तन भारतीय विजय और आत्मगौरव का प्रतीक माना जा रहा है।
मथुरा, अंबाला और जयपुर में वीरों को सम्मान
मथुरा कैंटोनमेंट की न्यू हॉर्न लाइन अब अब्दुल हमीद लाइन्स के नाम से जानी जाएगी, जो 1965 युद्ध के अद्वितीय साहस की याद दिलाती है। अंबाला में पैटरसन रोड क्वार्टर्स का नाम बदलकर धन सिंह थापा एन्क्लेव किया गया है, जबकि जयपुर कैंट की क्वींस लाइन रोड अब सुंदर सिंह मार्ग कहलाएगी।
सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों और पूर्वोत्तर में भी बदलाव
देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी में औपनिवेशिक नामों की जगह नुब्रा ब्लॉक और कारगिल ब्लॉक जैसे नाम दिए गए हैं, जो सामरिक महत्व और युद्ध विजय की स्मृति से जुड़े हैं। पूर्वोत्तर के रंगापहाड़ और जाखमा सैन्य स्टेशनों पर भी स्थानीय वीरों—लाशराम ज्योतिन सिंह और हंगपन दादा—के नाम पर मार्ग और परिसर नामित किए गए हैं।
बरेली और महू में ऐतिहासिक पुनर्स्मरण
बरेली कैंटोनमेंट की न्यू बर्डवुड लाइन अब थिमैया कॉलोनी के रूप में जानी जाएगी, जो भारतीय सेना के प्रतिष्ठित नेतृत्व को सम्मान देती है। अन्य सैन्य क्षेत्रों में भी इसी प्रकार के नाम परिवर्तन लागू किए गए हैं। भारतीय सेना के अनुसार, यह पहल केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वतंत्र भारत की सैन्य अस्मिता, बलिदान और परंपरा को स्थायी रूप से स्थापित करने का प्रयास है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपने नायकों को पहचान सकें और उनसे प्रेरणा ले सकें।




