🟠 S-500 पर नहीं बनी सहमति
बीबीएन, नेटवर्क | रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नई दिल्ली यात्रा के बीच भारत और रूस ने गुरुवार को अपनी दीर्घकालिक रक्षा साझेदारी को नई गति देने पर सहमति दर्ज की। दोनों देशों ने विशेष सैन्य तकनीकों के संयुक्त विकास, उन्नत हथियार प्रणालियों के स्थानीय उत्पादन और डिफेंस-इंडस्ट्रियल सहयोग को और मजबूत करने का निर्णय लिया।
बैठकों में S-400 सिस्टम की लंबित आपूर्ति, भारतीय वायुसेना के सुखोई-30MKI के अपग्रेड, ब्रह्मोस के उन्नत संस्करणों के विकास, 280 नई मिसाइलों की खरीद और सीमा तनाव के बीच सामरिक आवश्यकताओं की पूर्ति जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। वहीं, रूस ने साफ किया कि S-500 सिस्टम की तत्काल आपूर्ति संभव नहीं है, जबकि भारत ने Su-57 फाइटर जेट पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया है। यह सहयोग ऐसे समय में बढ़ाया जा रहा है, जब वैश्विक दबावों के बीच भारत अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता और रक्षा आत्मनिर्भरता पर जोर दे रहा है।
मोदी–पुतिन समिट से पहले बढ़ी रणनीतिक तालमेल
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रूस के रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव के बीच हुई उच्च-स्तरीय बैठक में दोनों देशों के रिश्तों को “गहरे भरोसे, साझा सिद्धांतों और पारस्परिक सम्मान” पर आधारित बताया गया। दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग के जारी और संभावित क्षेत्रों पर एक विस्तृत प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए। यह 22वीं अंतर-सरकारी बैठक भारत के उस संकल्प को दोहराती है, जिसमें वह किसी भी बाहरी दबाव के बावजूद अपने रणनीतिक हितों से समझौता न करने की नीति पर कायम है।
S-400, मिसाइलें और अपग्रेड योजनाएं
बैठक में भारत की सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए कई महत्वपूर्ण रक्षा परियोजनाओं की समीक्षा की गई।
◼ भारत को लंबित दो S-400 स्क्वाड्रन अगले वर्ष मिलने का आश्वासन दिया गया।
◼ उन्नत अकुला-श्रेणी की परमाणु पनडुब्बी 2028 तक मिलने की समयसीमा तय की गई।
◼ सुखोई-30MKI विमानों को लंबी दूरी की R-37 और RVV-BD मिसाइलों से लैस करने को प्राथमिकता दी गई।
◼ Pantsir और Verba एयर डिफेंस सिस्टम पर भी चर्चा हुई।
◼ रूस ने स्पष्ट किया कि S-500 सिस्टम की सप्लाई फिलहाल संभव नहीं है।
भारतीय वायुसेना की रणनीतिक ज़रूरतें
इंडियन एयरफोर्स (IAF) चाहती है कि उसके सुखोई बेड़े को R-37 जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस किया जाए, ताकि पाकिस्तान के चीनी J-10 लड़ाकू विमानों और PL-15 मिसाइलों से उत्पन्न खतरे का प्रभावी जवाब दिया जा सके। हाल के सीमा तनाव के दौरान मिसाइल स्टॉक में हुई कमी को ध्यान में रखते हुए भारत ने 280 नई मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दी है।
ब्रह्मोस का दायरा और भविष्य
भारत–रूस के संयुक्त उद्यम ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने मिसाइल रेंज को 450 किमी तक बढ़ा दिया है और इसे 800 किमी तक ले जाने की योजना है। हल्के लड़ाकू विमानों के लिए ब्रह्मोस-NG के विकास से भारत की स्ट्राइक क्षमता कई गुना बढ़ेगी। अब तक ब्रह्मोस से जुड़े सौदों का कुल मूल्य 58,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, जिससे यह तीनों सेनाओं के लिए प्रमुख प्रिसिजन स्ट्राइक हथियार बन चुका है।
आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को बढ़ावा
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता और निर्यात क्षमता बढ़ाने पर निरंतर काम कर रहा है। रूस ने भी भरोसा दिलाया कि वह भारत को जरूरत के अनुरूप तकनीक, पुर्जे और प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराता रहेगा, ताकि कोई भी देरी भारत की रणनीतिक तैयारी को प्रभावित न करे।
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