बीबीएन, नेटवर्क। भारतीय सेना के सेवारत एवं सेवानिवृत्त जवानों और उनके परिवारों को अब उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा और उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। इसकी शुरुआत मंगलवार को तब हुई, जब भारतीय सेना और महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (MGUMST) के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते के तहत सैन्य कर्मियों के बच्चों को मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में प्रवेश पर प्रति वर्ष 1 लाख रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी। साथ ही, अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में पढ़ने वाले आश्रितों को ट्यूशन फीस का एक तिहाई हिस्सा छात्रवृत्ति के रूप में मिलेगा।
सेवारत और सेवानिवृत्त सैनिकों को ऐसे उन्नत उपचार, जो सेना के चिकित्सा संस्थानों में उपलब्ध नहीं हैं और एक्स-सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम के दायरे में भी नहीं आते, एमजीयूएमएसटी द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। सप्त शक्ति कमान के सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह की मौजूदगी में हुए इस समझौते को सैन्य कल्याण और चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया जा रहा है।
इस साझेदारी से भारतीय सेना के कर्मियों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है। यह समझौता एमजीयूएमएसटी की सामाजिक जिम्मेदारी और सशस्त्र बलों के प्रति प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है। विश्वविद्यालय ने इससे पहले भी सैन्य परिवारों के लिए विशेष पहल चलाई हुई हैं, लेकिन यह समझौता अब तक का सबसे व्यापक और संरचित कार्यक्रम है।
जयपुर स्थित रक्षा जन संपर्क अधिकारी कर्नल निखिल धवन ने बताया कि इस समझौते से हजारों सैन्य परिवारों को सीधा लाभ पहुंचेगा और यह ‘हर काम देश के नाम’ के आदर्श को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे सैन्यकर्मियों के बच्चों को चिकित्सा जैसे प्रतिष्ठित पेशों में करियर बनाने के लिए आर्थिक बोझ कम होगा और जवानों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा मिल सकेगी।



