बीबीएन, नेटवर्क। ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक मर्तबा फिर पश्चिमी सरहद सायरनों की तेज आवाज से गूंज उठी। सुबह 11 बजे 11 प्रमुख स्थानों पर लगे डिजिटल सायरन एक साथ सक्रिय हुए और करीब पांच मिनट तक बजते रहे। अचानक आई इस ध्वनि से कुछ समय के लिए लोग चौंक गए, लेकिन प्रशासन की पूर्व सूचना के कारण स्थिति शीघ्र सामान्य हो गई। यह पूरी कवायद किसी आपात स्थिति के लिए तैयार किए गए हाई-टेक डिजिटल सायरन सिस्टम के परीक्षण का हिस्सा थी। ये घटनाक्रम सरहदी जिले जैसलमेर में शुक्रवार सुबह हुआ।
रणनीतिक स्थानों पर लगाए गए सायरन
नगर परिषद की ओर से शहर के प्रमुख और व्यस्त चौराहों पर यह सायरन सिस्टम स्थापित किया गया है। इन स्थानों का चयन इस प्रकार किया गया है कि अलर्ट की आवाज शहर के अधिकतम हिस्से तक पहुंच सके। परीक्षण के दौरान बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर हलचल जरूर बढ़ी, लेकिन लोगों ने संयम बनाए रखा।
आधुनिक तकनीक से लैस है सिस्टम
करीब 14.5 लाख रुपए की लागत से तैयार इस डिजिटल सायरन सिस्टम में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है। प्रत्येक सायरन को जीएसएम आधारित नेटवर्क से जोड़ा गया है, जिससे यह 24 घंटे सक्रिय रहता है। एक विशेष मोबाइल ऐप के माध्यम से इसे नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे अधिकारी कहीं से भी पूरे शहर को एक साथ अलर्ट कर सकते हैं।
आपदा प्रबंधन में मिलेगा फायदा
प्रशासन के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण जैसलमेर में आपात स्थिति के दौरान त्वरित सूचना पहुंचाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। आगजनी, प्राकृतिक आपदा या किसी सुरक्षा खतरे की स्थिति में यह सिस्टम कम समय में अधिकतम लोगों तक चेतावनी पहुंचाने में सहायक होगा।
सुरक्षा तैयारियों में अहम कदम
हाल के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन लगातार अपनी सुरक्षा और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत कर रहा है। डिजिटल सायरन सिस्टम का यह सफल परीक्षण उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इस नई व्यवस्था के साथ जैसलमेर तकनीकी रूप से अधिक सक्षम और सजग शहर के रूप में उभर रहा है। आने वाले समय में यह सिस्टम किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगा।



