बलजीत गिल.
बीबीएन, बीकानेर |बीकानेर रेंज के हनुमानगढ़ जिले से ड्रोन के जरिये हथियारों और विस्फोटक पदार्थों की सप्लाई के खुलासे के बाद देशभर की सुरक्षा एजेंसियों में हलचल मच गई है। केंद्रीय एजेंसियों को मिले इनपुट के आधार पर BSF ने वैज्ञानिक तरीक़े अपनाते हुए पाकिस्तान की ओर से सक्रिय ड्रोन रूट्स और उनकी सीक्रेट लोकेशन को ट्रैक कर लिया है।
इस हाई-टेक जांच में अमृतसर स्थित स्टेट-ऑफ-द-आर्ट ड्रोन फॉरेंसिक लैबोरेट्री की महत्वपूर्ण भूमिका रही। फॉरेंसिक विश्लेषण से यह पता लगाया गया कि ड्रोन किस स्थान से उड़ान भरते हैं, कितनी दूरी तय करते हैं और किस बिंदु पर अवैध खेप गिराते हैं। इसी आधार पर सुरक्षा बलों ने राजस्थान और पंजाब के उस पूरे नेटवर्क को मैप कर लिया है, जहां से तस्करी की गतिविधियां संचालित होती थीं।
पाकिस्तान कर रहा है फ्रीक्वेंसी-हॉपिंग ड्रोन इस्तेमाल
फॉरेंसिक डाटा से पता चला है कि पाकिस्तान ऐसे ड्रोन उड़ा रहा है जो लगातार अपनी रेडियो फ्रीक्वेंसी बदलते रहते हैं। इस “फ्रीक्वेंसी-हॉपिंग” तकनीक के कारण इनकी लोकेशन पकड़ पाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसी प्रणाली का फायदा उठाकर छोटे और सस्ते ड्रोन के माध्यम से हथियारों व ड्रग्स की सप्लाई की जाती थी। कुछ समय पहले दिल्ली ब्लास्ट केस में गिरफ्तार आरोपियों की पूछताछ में खुलासा हुआ था कि राजस्थान के हनुमानगढ़ रूट से हथियारों की एक बड़ी खेप भेजी गई थी।
राजस्थान, पंजाब और जम्मू की संदिग्ध लोकेशन की पहचान
दिल्ली विस्फोट के बाद फरीदाबाद और गुजरात में पकड़े गए संदिग्धों ने पूछताछ में बताया कि पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के जरिये राजस्थान और पंजाब में अवैध सामान गिराया जाता रहा है, जिसके बाद BSF ने इन रूट्स की खोज तेज कर दी। BSF पश्चिमी कमान के ADG सतीश एस. खंडारे ने बताया कि सभी संदिग्ध लोकेशन की पहचान हो चुकी है और अब सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम बड़े पैमाने पर लागू किए जा रहे हैं, जो किसी भी संदिग्ध ड्रोन को आकाश में ही नष्ट करने की क्षमता रखते हैं।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान द्वारा चुने गए इलाके बेहद दुर्गम हैं, जिन तक सामान्य पहुंच संभव नहीं है, इसलिए हाई-टेक इंटेलिजेंस और फॉरेंसिक विश्लेषण ने इस नेटवर्क को तोड़ने में निर्णायक भूमिका निभाई।
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