बीबीएन,बीकानेर। मिट्टी की उर्वरा शक्ति घट रही है, रासायनिक खादों का अंधाधुंध इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ ने बीकानेर के नोरंगदेसर और गुसाईसर गांवों में जोर पकड़ लिया है। 15 जून 2026 को भाकृअनुप-केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान (CIAH), बीकानेर की टीम ने इन गांवों में कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती, सरकारी योजनाओं के लाभ और मिट्टी स्वास्थ्य प्रबंधन की जानकारी दी।
रासायनिक खादों पर निर्भरता से घटी मिट्टी की उर्वरता
विशेषज्ञों के अनुसार पिछले दशक में बीकानेर संभाग में अनियंत्रित उर्वरक उपयोग से जमीन में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा में 15-20% की गिरावट आई है। संस्थान के वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यही सिलसिला जारी रहा, तो अगले 5-7 साल में बागवानी फसलों की पैदावार 30% तक घट सकती है। ‘खेत बचाओ अभियान’ इसी संकट के बीच किसानों के लिए एक जागरूकता मिशन के रूप में उभरा है।
वैज्ञानिकों ने दी ये जरूरी सलाह
· डॉ. एस आर मीना ने किसानों से प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि संतुलित उर्वरकों पर ध्यान देना ही ‘खेत बचाओ’ की पहली सीढ़ी है।
· डॉ. धुरेन्द्र सिंह ने बागवानी फसलों में जैव-उर्वरकों (बायो-फर्टिलाइजर्स) के उपयोग और मूल्य संवर्धन के तरीके बताए।
· डॉ. डी.के. समादिया ने गुसाईसर गांव में काचरी, काकड़िया, ग्वारफली और खेजरी की वैज्ञानिक खेती पर चर्चा की। साथ ही स्थानीय संसाधनों से पौष्टिक भोजन उत्पादन पर जोर दिया।
· डॉ. रमेश कुमार ने बीलपत्र और नींबू वर्गीय फसलों में ड्रिप सिंचाई के साथ फर्टिगेशन (उर्वरक सिंचाई) को आपदा और सूखा-रोधी समाधान बताया।




