बीबीएन,बीकानेर। राजस्थान की मरुस्थलीय पहचान और पर्यावरणीय जीवनरेखा माने जाने वाले खेजड़ी वृक्षों की कटाई के विरोध में सोमवार को बिश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रदर्शन किया।
महाराज सच्चिदानंद के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने एडीएम को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर खेजड़ी संरक्षण के लिए तत्काल कठोर कानून बनाने, अवैध कटाई पर पूर्ण रोक लगाने और सोलर परियोजनाओं के नाम पर हो रही पेड़ों की कटाई पर कार्रवाई की मांग की। समाज ने चेतावनी दी कि मानसून सत्र में कानून नहीं बना तो प्रदेशभर में आंदोलन तेज किया जाएगा और विधानसभा का घेराव किया जाएगा।
दस जिलों में खेजड़ी कटाई का आरोप
ज्ञापन में कहा गया कि बीकानेर, जोधपुर, नागौर, बाड़मेर, फलोदी, बालोतरा, जालौर, पाली, अजमेर और चूरू समेत कई जिलों में सोलर परियोजनाओं के लिए बड़ी संख्या में खेजड़ी वृक्ष काटे जा रहे हैं। इससे मरुस्थलीय पारिस्थितिकी, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर असर पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि खेजड़ी केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का हिस्सा है।
नेताओं पर वादाखिलाफी का आरोप
अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र बुडिया ने कहा कि पर्यावरण संघर्ष समिति के नेतृत्व में हुए महापड़ाव और जनआंदोलन के दौरान सरकार ने खेजड़ी संरक्षण के लिए प्रभावी कानून बनाने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद अब तक कानून नहीं बन सका है।
पर्यावरण संघर्ष समिति के परसाराम बिश्नोई ने कहा कि खेजड़ली बचाओ आंदोलन को करीब दो वर्ष होने जा रहे हैं। सरकार के मुखिया ने पहले नागौर और बाद में जयपुर में समाज के प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान पेड़ों की सुरक्षा के लिए सख्त ट्री एक्ट लाने का भरोसा दिया था, लेकिन दोनों बार वादा पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यदि मानसून सत्र में कानून नहीं आया तो समाज इस बार निर्णायक संघर्ष करेगा।
चुनावों में जवाब देने की चेतावनी
पूर्व पार्षद मनोज बिश्नोई ने कहा कि आंदोलन के दौरान बीकानेर पहुंचे सरकार के प्रतिनिधि अब समाज से दूरी बना रहे हैं, जबकि खेजड़ी और अन्य हरे वृक्षों की कटाई जारी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की 36 कौमों में खेजड़ी संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। सरकार यदि विधानसभा सत्र में कानून नहीं लाती है तो पंचायत और निकाय चुनावों में जनता भाजपा को इसका जवाब देगी प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए तो प्रदेशव्यापी जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।
ये रहे मौजूद
प्रदर्शन के दौरान हड़मान बेनीवाल, मोखराम धारणिया, सुभाष बिश्नोई, रामगोपाल बिश्नोई, मांगीलाल नोखड़ा, रामकिशन डेलू, रिछपाल फौजी, भोमाराम भादू, हेतराम डूडी, दिनेश, रामदयाल बेनीवाल, सुनील सींगड़, भंवरलाल कूकणा, मुकेश पन्नू, लक्ष्मण कुमावत, राकेश बिश्नोई, संदीप खींचड़ और अनिल बिश्नोई सहित कई लोग मौजूद रहे।





