बीबीएन,बीकानेर। बीकानेर की स्थायी लोक अदालत (पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज) ने जैसलमेर रोड स्थित देहुक माता मंदिर परिसर से जुड़े विवाद में दायर याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि विवादित भूमि का मूल्य ₹1 करोड़ से अधिक है, जो लोक अदालत के वित्तीय अधिकार क्षेत्र से बाहर है। साथ ही यह मामला सार्वजनिक उपयोगिता सेवा में कमी का नहीं बल्कि भूमि स्वामित्व और कथित अतिक्रमण से जुड़ा पाया गया।
मुरलीधर व्यास कॉलोनी निवासी अनिल कुमार और रामपुरा बस्ती निवासी रमेश कुमार पुरोहित ने याचिका दायर कर मंदिर परिसर के रखरखाव, राष्ट्रीय राजमार्ग से मंदिर तक सड़क मरम्मत, नालियों व फुटपाथ निर्माण, सार्वजनिक शौचालयों की देखरेख और अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन को निर्देश देने की मांग की थी। इस मामले में राज्य सरकार, जिला कलेक्टर, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट, तहसीलदार और बीकानेर विकास प्राधिकरण को प्रतिवादी बनाया गया था।
सुनवाई के दौरान बीकानेर विकास प्राधिकरण ने अदालत को बताया कि विवादित भूमि खसरा नंबर 8/5 सरकारी भूमि है और वर्ष 2019 से प्राधिकरण के नाम दर्ज है। प्राधिकरण के अनुसार मंदिर परिसर में बने निर्माण अधिकृत नहीं हैं और यह मामला सार्वजनिक उपयोगिता सेवा की श्रेणी में भी नहीं आता।
स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार सैनी और सदस्य प्रियंका पुरोहित की पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि याचिकाकर्ता विवादित भूमि पर अपना वैधानिक अधिकार सिद्ध नहीं कर सके। साथ ही यह विवाद बीकानेर विकास प्राधिकरण अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के दायरे में आता है, जिसके कारण लोक अदालत का अधिकार क्षेत्र लागू नहीं होता। अदालत ने 10 मार्च 2026 को पारित आदेश में याचिका को अस्वीकार करते हुए कहा कि पक्षकार यदि चाहें तो अपनी शिकायत के समाधान के लिए सक्षम मंच का सहारा ले सकते हैं। मुकदमे का खर्च प्रत्येक पक्ष स्वयं वहन करेगा।



