बीबीएन, नेटवर्क | राज्य की औद्योगिक नगरी बालोतरा में आयोजित राजस्थान शिक्षक संघ प्रगतिशील के 63वें प्रांतीय शैक्षिक सम्मेलन में प्रदेश भर से आए हजारों शिक्षकों ने एक स्वर में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर चिंता जताई। सम्मेलन में शिक्षकों की भारी कमी, पदोन्नति और स्थानांतरण की लंबित प्रक्रियाएं, भौतिक संसाधनों का अभाव तथा भर्ती परीक्षाओं व नियुक्तियों में हो रही देरी जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठे। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि मौजूदा हालात में शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना कठिन होता जा रहा है और इसके लिए सरकार को तत्काल ठोस निर्णय लेने होंगे।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि विद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों के हजारों पद रिक्त हैं, जिससे कार्यभार असंतुलित हो गया है। तृतीय श्रेणी शिक्षकों पर अत्यधिक दबाव है, जबकि पदोन्नति और स्थानांतरण वर्षों से अटके हुए हैं। द्वितीय श्रेणी से व्याख्याता पदोन्नति की प्रक्रियाओं में देरी को भी गंभीर समस्या बताया गया।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि शिक्षक आज दूर-दराज़ के गांवों और ढाणियों में सेवा दे रहे हैं, लेकिन संसाधनों की कमी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में बाधा बन रही है। सम्मेलन में यह मांग प्रमुख रही कि सरकार अन्य मदों में व्यय में संतुलन बनाकर शिक्षा क्षेत्र को प्राथमिकता दे। साथ ही, भर्ती परीक्षाओं के परिणाम और पदस्थापन में अनावश्यक विलंब समाप्त करने पर जोर दिया गया।
सम्मेलन के अंत में यह संकल्प व्यक्त किया गया कि जिलों से प्राप्त प्रस्तावों पर प्रदेश कार्यकारिणी में विचार कर उन्हें राज्य सरकार को भेजा जाएगा, ताकि शिक्षा के क्षेत्र में ठोस सुधार सुनिश्चित हो सके।


