बीबीएन,बीकानेर। राजस्थान हाईकोर्ट ने बीकानेर के एक पीड़ित परिवार को कथित आपराधिक धमकियां मिलने के मामले में गंभीर रुख अपनाते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक और गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि नागरिकों की सुरक्षा राज्य की अनिवार्य संवैधानिक जिम्मेदारी है और यदि सुरक्षा तंत्र पर ही संदेह उत्पन्न हो जाए तो जनविश्वास को गहरा आघात पहुंचता है। पीड़ित पक्ष की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने स्थानीय पुलिस प्रशासन को तत्काल प्रभाव से प्रभावी सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले किसी भी हस्तक्षेप को रोकने के निर्देश दिए।
मामला उस याचिका से संबंधित है जिसे अल्ताफ बानो और उनके परिजनों की ओर से प्रस्तुत किया गया था। याचिका में आरोप लगाया गया कि पूर्व में दर्ज प्रकरण से जुड़े विवाद के कारण परिवार को आपराधिक तत्वों के माध्यम से धमकियां दी गईं, जिससे उनके जीवन और स्वतंत्रता पर खतरा उत्पन्न हुआ। अदालत ने प्राथमिक दृष्टि से आरोपों की गंभीरता स्वीकार करते हुए कहा कि यदि राज्य तंत्र नागरिकों की रक्षा करने में विफल रहता है तो यह संविधान प्रदत्त मूल अधिकारों के प्रतिकूल स्थिति होगी।
न्यायमूर्ति फरजंद अली की पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि जब सुरक्षा देने वाली व्यवस्था पर ही प्रश्नचिह्न लगने लगें तो लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। अदालत ने निर्देश दिया कि जांच निष्पक्ष एजेंसी स्तर पर की जाए, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र रूप से समीक्षा हो तथा पीड़ित परिवार और संभावित गवाहों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता पर सुनिश्चित की जाए। साथ ही, अदालत ने यह भी कहा कि यदि सुरक्षा प्रबंधों में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है या पीड़ित पक्ष को नुकसान पहुंचता है, तो उत्तरदायी अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जा सकती है। इस निर्देश के साथ न्यायालय ने राज्य प्रशासन से अपेक्षा की कि वह विधि के शासन और नागरिक अधिकारों की रक्षा के प्रति अपनी संवैधानिक प्रतिबद्धता को व्यवहार में प्रदर्शित करे।
यह आदेश ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब संगठित अपराध और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े प्रश्न सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में हैं। न्यायालय की टिप्पणी को कानून के शासन, पारदर्शिता और नागरिक सुरक्षा के सिद्धांतों की पुनर्पुष्टि के रूप में देखा जा रहा है।
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