बीबीएन, नेटवर्क। जोधपुर में भारतीय सेना ने 25 देशों से आए अंतरराष्ट्रीय रक्षा पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल के सामने अपनी आधुनिक सैन्य क्षमताओं, स्वदेशी हथियार प्रणालियों और सीमांत क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों का व्यापक प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में मरुस्थलीय इलाकों में संचालन की दक्षता, अत्याधुनिक उपकरणों का समावेश, सैन्य-नागरिक समन्वय और पश्चिमी सीमा से जुड़े अवसंरचनात्मक सुधारों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। सेना की परिवर्तन यात्रा और आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण की दिशा में उठाए गए कदम इस संवाद का केंद्र रहे।
दक्षिणी कमान के कोणार्क कोर की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में पत्रकारों को बताया गया कि स्वदेशी तकनीकों के प्रयोग से सेना की सामरिक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। रेगिस्तानी परिस्थितियों में त्वरित तैनाती, सटीक प्रहार क्षमता और आधुनिक निगरानी प्रणालियों का प्रदर्शन भी किया गया।
सेना के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता केवल सामरिक आवश्यकता नहीं, बल्कि दीर्घकालिक राष्ट्रीय नीति का हिस्सा है। देश में विकसित हो रही नई हथियार प्रणालियां और प्लेटफॉर्म वैश्विक मानकों के अनुरूप हैं तथा निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, पुल और संचार नेटवर्क के विस्तार की जानकारी साझा की गई। इन परियोजनाओं से न केवल सैन्य तैयारियों को बल मिला है, बल्कि स्थानीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को भी गति मिली है। कौशल विकास अभियानों और जनसंपर्क पहलों के माध्यम से सेना ने नागरिक सहभागिता को मजबूत करने पर बल दिया।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय सेना की पेशेवर दक्षता, तकनीकी उन्नयन और वैश्विक सहयोग की प्रतिबद्धता की सराहना की। इस आयोजन ने भारत की रक्षा तैयारियों और विकासोन्मुख दृष्टिकोण को एक साथ प्रस्तुत किया।




