बीबीएन,बीकानेर। राजस्थान के पश्चिमी रेगिस्तान स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में चल रहे ‘खड़गा शक्ति 2026’ युद्धाभ्यास के दौरान भारतीय सेना ने आधुनिक और पारंपरिक युद्ध कौशल का समेकित प्रदर्शन किया।
लगभग दस हजार फीट की ऊंचाई से पैराट्रूपरों की सामरिक छलांग, चेतक और चीता हेलीकॉप्टरों द्वारा त्वरित एम्युनिशन आपूर्ति व रेकी, हथियारों से लैस अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर की सटीक मारक कार्रवाई, स्वॉर्म और लॉजिस्टिक ड्रोन का उपयोग तथा तोपखाने की समन्वित फायरिंग—इन सभी अभियानों ने स्पष्ट संकेत दिया कि सेना बदलते युद्ध परिदृश्य के अनुरूप पूरी तैयारी में है।

अभ्यास के तहत पैराट्रूपर दस्तों ने निर्धारित क्षेत्र में उतरकर काल्पनिक शत्रु को चारों ओर से घेरने की रणनीति अपनाई। इसके साथ ही चीता हेलीकॉप्टर ने अग्रिम क्षेत्र में हवाई टोही कर दुश्मन की गतिविधियों की सूचना कमांड मुख्यालय तक पहुंचाई। चेतक हेलीकॉप्टरों ने गोला-बारूद और आवश्यक सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित की, जिससे अग्रिम मोर्चे पर तैनात टुकड़ियों की संचालन क्षमता निर्बाध बनी रही।
हथियारों से सुसज्जित अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों ने चिन्हित लक्ष्यों पर नियंत्रित और सटीक प्रहार किए। जमीनी स्तर पर टैंक, बख्तरबंद वाहन और मशीनीकृत पैदल सेना ने एकीकृत फायरिंग ड्रिल के माध्यम से आगे बढ़ते हुए लक्ष्य भेदन का अभ्यास किया। कमांडो की अग्रिम टुकड़ी ने दुश्मन के ठिकानों की पहचान कर उनकी सूचना तोपखाना इकाइयों को दी, जिसके बाद समन्वित गोलाबारी से लक्ष्यों को निष्प्रभावी किया गया।
इस अभ्यास की एक प्रमुख विशेषता ड्रोन आधारित निगरानी और आक्रमण प्रणाली रही। स्वॉर्म ड्रोन और क्वाडकॉप्टर के माध्यम से वास्तविक समय में लक्ष्य चिन्हांकन किया गया, जबकि लॉजिस्टिक ड्रोन से आवश्यक सामग्री अग्रिम मोर्चे तक पहुंचाई गई। ‘देखो और मारो’ सिद्धांत पर आधारित लोइटर म्यूनिशन प्रणाली का भी परीक्षण किया गया, जिससे भविष्य के नेटवर्क-केंद्रित युद्ध की तैयारी को परखा जा सके।
वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने अभ्यास का निरीक्षण कर विभिन्न चरणों की समीक्षा की। सेना के अनुसार, यह अभ्यास केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि त्वरित तैनाती, हवाई-स्थलीय समन्वय और तकनीक आधारित युद्धक क्षमता की जांच का व्यापक प्रयास है। बदलती वैश्विक सुरक्षा परिस्थितियों के बीच यह अभ्यास सामरिक तत्परता और संयुक्त संचालन क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रेगिस्तान की तपती रेत पर संपन्न यह अभ्यास इस बात का संकेत है कि सीमाई चुनौतियों के मद्देनजर सेना बहु-आयामी युद्ध कौशल और आधुनिक संसाधनों के साथ तैयार है।



