बीबीएन, नेटवर्क, 3 सितंबर। सीमा पर संकट हो और गांव के लोग पीछे हट जाएं, ऐसा मुमकिन नहीं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बाड़मेर जिले के बाखासर ग्राम पंचायत के सरपंच भंवरलाल बामनिया ने यही साबित किया। सेना की मदद के लिए उठाए उनके कदमों को देखते हुए उन्हें आर्मी चीफ कमेंडेशन कार्ड से सम्मानित किया गया है।
भंवरलाल ने कहा, “देश की रक्षा केवल सेना का काम नहीं, हर नागरिक की जिम्मेदारी है। जब हमारी सेना दुश्मन से जूझ रही थी, तब हमने सिर्फ यही सोचा कि हमारी तरफ से उन्हें कोई दिक्कत न हो।”
गांव के स्कूल से लेकर अपना घर तक सौंप दिया सेना को
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की तरफ से कई बार ड्रोन हमले की कोशिशें हुईं। इस खतरे के बीच भारतीय सेना को गांव के भीतर जगह-जगह तैनात होना पड़ा। तब सरपंच ने बिना देर किए विद्यालय, पंचायत भवन, अस्पताल और यहां तक कि अपना निजी स्कूल व नया बना मकान भी सेना को सौंप दिया।
इतना ही नहीं, कई बार ब्लैकआउट की स्थिति आई तो उन्होंने गांववालों को समझाया और सेना के निर्देश तुरंत लागू करवाए। गांव के बोरवेल से लगातार पानी की आपूर्ति सुनिश्चित कर सैनिकों की जरूरतें पूरी कीं।
सम्मान सिर्फ सरपंच का नहीं, पूरे गांव का
सेना के इस सम्मान को गांववाले भी अपनी जीत मान रहे हैं। स्थानीय लोग कहते हैं कि भंवरलाल ने साबित किया कि सीमा पर सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि गांव-गांव का सहयोग भी सेना की ताकत है।


