बीबीएन, नेटवर्क, 10 सितंबर। भारतीय सेना की ताकत में जबरदस्त इज़ाफा हुआ है। हाल ही में सेना को 5000 नई AK‑203 राइफलें मिल चुकी हैं। ये राइफलें उत्तर प्रदेश के अमेठी में कोरवा ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में तैयार की जा रही हैं। इन्डो‑रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) के तहत ये राइफलें ‘मेक इन इंडिया’ योजना के तहत निर्मित की जा रही हैं। अब तक सेना को कुल 53,000 AK‑203 राइफलें उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।
कड़े परीक्षणों के बाद इन राइफलों की डिलीवरी की गई, जिसमें DGQA ने गुणवत्ता की पुष्टि की। सेना के अधिकारियों ने कहा कि अब तक इन राइफलों की गुणवत्ता पर कोई शिकायत नहीं आई है। ये आधुनिक राइफलें पुरानी INSAS राइफलों की जगह लेंगी और सेना की मारक क्षमता को नई ऊँचाइयों पर पहुंचाएंगी।
मेक इन इंडिया से आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम
वर्ष 2019 में शुरू हुई इस परियोजना में भारत और रूस की साझेदारी है। भारत की 50.5% हिस्सेदारी और रूस की 49.5% हिस्सेदारी है। 5200 करोड़ रुपये की लागत से 6.1 लाख राइफलें बनाने का लक्ष्य रखा गया है। पूरा ऑर्डर दिसंबर 2030 तक पूरा कर लिया जाएगा, जो तय समय से 22 महीने पहले होगा। रूस से 100% तकनीकी हस्तांतरण भी हो चुका है। इस राइफल का नया नाम ‘शेर’ रखा गया है, जो इसकी ताकत और आधुनिकता का प्रतीक है।
सेना के लिए नया युग
सेना ने 1990 से INSAS राइफलों का इस्तेमाल किया, लेकिन जाम होने, मैगज़ीन टूटने और कठिन परिस्थितियों में खराब प्रदर्शन जैसी शिकायतों ने इसे बदलने की जरूरत पैदा कर दी। अब AK‑203 राइफलें सेना की पहली पसंद बनेंगी। पहले जरूरतों के लिए 70,000 AK‑103 राइफलें रूस से मंगाई गई थीं, लेकिन अब AK‑203 का उत्पादन भारत में ही हो रहा है, जिससे देश की आत्मनिर्भरता को मजबूती मिली है।
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