पुणे वर्कशॉप से निकला पहला VT-72B, युद्धक्षेत्र में टैंकों को मिलेगा त्वरित सहारा
बीबीएन, नेटवर्क, 20 सितंबर। भारतीय सेना ने अपनी परिचालन क्षमता को और धारदार बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया है। पुणे स्थित 512 आर्मी बेस वर्कशॉप (ABW) से सेना का पहला ओवरहॉल्ड आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल (ARV) VT-72B लॉन्च किया गया। यह वाहन युद्धक्षेत्र में क्षतिग्रस्त टैंकों और भारी हथियारबंद गाड़ियों की मरम्मत व रिकवरी के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
इस प्रोजेक्ट में सेना को एयरबॉर्निक्स डिफेंस एंड स्पेस प्राइवेट लिमिटेड (ADSL), जो जेसीबीएल ग्रुप की सब्सिडियरी है, का सहयोग मिला। इसे उद्योग और सेना के बीच गहरे तालमेल का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
VT-72B की खासियत
VT-72B मूल रूप से T-72 टैंक के चेसिस पर आधारित आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल है। 1994 और 1997 में भारत ने स्लोवाकिया से ऐसे 80 से अधिक वाहन खरीदे थे। इसमें 15 टन क्षमता वाला क्रेन, डोजर ब्लेड, विंच और मरम्मत उपकरण लगे हैं। साथ ही यह 12.7 मिमी मशीनगन से लैस है। अब तक स्पेयर पार्ट्स की कमी इसकी सबसे बड़ी चुनौती थी, जिसे ओवरहॉल प्रक्रिया से दूर किया गया है।
प्रोजेक्ट ‘लोटस’ से आत्मनिर्भरता की ओर कदम
प्रोजेक्ट लोटस के तहत ADSL ने वाहन को पूरी तरह तोड़कर उसके जरूरी हिस्सों की मरम्मत और प्रतिस्थापन किया। मेजर यूनिट असेंबली (MUAs) को भी नए सिरे से फिट किया गया। इस प्रक्रिया से आयातित पुर्ज़ों पर निर्भरता घटेगी और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में रक्षा क्षेत्र की क्षमताएं मजबूत होंगी।
सेना को मिलेगा सीधा फायदा
ओवरहॉल के बाद VT-72B न केवल सेना के आर्मर्ड फ्लीट की उम्र बढ़ाएगा, बल्कि ऑपरेशनल रेडीनेस और बैटलफील्ड मोबिलिटी को भी नई ताकत देगा। युद्धक्षेत्र या प्रशिक्षण के दौरान टैंकों की त्वरित मरम्मत से डाउनटाइम कम होगा और आर्मर्ड फॉर्मेशन्स की उपलब्धता बढ़ेगी।
जेसीबीएल ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर रिशी अग्रवाल ने कहा, “भारतीय सेना के साथ VT-72B के ओवरहॉल में साझेदारी हमारे लिए गर्व की बात है। यह परियोजना हमारी इंजीनियरिंग क्षमता और भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।” विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रयास भविष्य में पूरे फ्लीट के अपग्रेड का रास्ता खोलेंगे और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को और बढ़ाएंगे।
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