न्यायालय अधिकारी बनकर ठगी, राजस्थान पुलिस ने बताया कैसे बचें डिजिटल ठगों से
बीबीएन, नेटवर्क, 26 अक्टूबर। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने हाल में बढ़ रहे एक नये साइबर अपराध की ओर नागरिकों का ध्यान आकर्षित करते हुए चेतावनी जारी की है। विभाग ने बताया कि कुछ साइबर अपराधी अब खुद को न्यायालय अधिकारी, पुलिस अधिकारी या अधिवक्ता बताकर लोगों को फर्जी कोर्ट सम्मन और वारंट भेज रहे हैं तथा भय का माहौल बनाकर उनसे ऑनलाइन धन वसूल रहे हैं।
डीआईजी साइबर क्राइम विकास शर्मा ने बताया कि ठग अब ऐसे दस्तावेज़ तैयार करते हैं जो देखने में असली लगते हैं , इनमें डिजिटल हस्ताक्षर युक्त जमानती वारंट, फर्जी एफआईआर या कोर्ट सम्मन शामिल होते हैं। ये दस्तावेज़ प्रायः सोशल मीडिया, ईमेल या व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजे जाते हैं। अपराधी पीड़ितों को यह विश्वास दिलाते हैं कि उन पर कोई गंभीर मामला दर्ज है और मामला “सुलझाने” या “जमानत राशि” के नाम पर तुरंत ऑनलाइन भुगतान की मांग करते हैं। शर्मा ने बताया कि हाल ही में कई नागरिक इस प्रकार के भयादोहन का शिकार हुए हैं। “लोग डर के चलते बिना सत्यापन किए पैसे ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे अपराधी आसानी से लाभ उठा लेते हैं।
यदि किसी व्यक्ति को फर्जी नोटिस प्राप्त हो या संदेहास्पद कॉल आए, तो वह तुरंत अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन, साइबर थाने या साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कर सकता है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत सूचना दें। इसके लिए हेल्पलाइन 1930, 9256001930 और 9257510100 पर संपर्क किया जा सकता है।
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