बीबीएन, नेटवर्क। दक्षिणी सेना कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने मंगलवार को पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित अखिल-सैन्य अभ्यास ‘रुद्र शक्ति’ का निरीक्षण एवं समीक्षा किया। इस लाइव फायरिंग युद्धाभ्यास में यंत्रीकृत सेना, तोपखाना, वायु रक्षा प्रणाली, हल्के लड़ाकू तथा अपाचे हेलीकॉप्टरों, मानवरहित विमान प्रणालियों और उन्हें नष्ट करने वाली क्षमताओं का समन्वित प्रयोग किया गया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आधुनिक युद्धक्षेत्र में उच्च तीव्रता वाले संघर्षों के लिए भारतीय सेना की तैयारियों और एकीकृत क्षमता का सत्यापन करना था।
अभ्यास ‘रुद्र शक्ति’ को पिछले अभ्यास ‘अखंड प्रहार’ का अनुवर्ती बताया गया है। इस दौरान रुद्र ब्रिगेड और नई परिचालन अवधारणाओं का मरुस्थलीय परिस्थितियों में सफल परीक्षण हुआ। सेना प्रमुख ने अभ्यास के दौरान जमीनी सैनिकों से सीधा संवाद किया और उनकी सटीकता, गति तथा समन्वय क्षमता की प्रशंसा की। उन्होंने सभी रैंकों के जवानों की पेशेवर दक्षता एवं परिचालन तत्परता को उत्कृष्ट बताया।
सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल निखिल धवन ने बताया कि इस अभ्यास ने थल, वायु और डिजिटल क्षेत्र में सेना की बेहतर तालमेल क्षमता को रेखांकित किया है। यह अभ्यास सेना के निरंतर परिवर्तन और आधुनिकीकरण को दर्शाता है, जहां संगठनात्मक नवाचार, सामरिक विकास और तकनीकी एकीकरण पर समान बल दिया जा रहा है। सेना उभरती सुरक्षा चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए प्रौद्योगिकी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने को प्रतिबद्ध है।
इस युद्धाभ्यास में आर्मी एविएशन के उन्नत हल्के हेलीकॉप्टरों और अपाचे आक्रमणकारी हेलीकॉप्टरों ने भाग लिया, जिससे हवाई सहयोग क्षमता का प्रदर्शन हुआ। साथ ही, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक के प्रभावी उपयोग से आधुनिक युद्ध में तकनीकी बढ़त की अहमियत स्पष्ट हुई।
ऐसे अभ्यास देश की सुरक्षा तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और सैन्य बलों को भविष्य की लड़ाइयों के लिए तैयार करते हैं।




