बीबीएन, नेटवर्क। ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर गुरुवार को जयपुर स्थित साउथ वेस्टर्न कमांड मुख्यालय में भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सैन्य अभियान की उपलब्धियों, रणनीतिक बदलावों और भविष्य की तैयारियों की जानकारी दी। सेना के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भारत अब आतंकवादी ढांचों और उन्हें समर्थन देने वाली ताकतों के खिलाफ निर्णायक और सटीक कार्रवाई की नीति पर आगे बढ़ रहा है। अधिकारियों ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता, तीनों सेनाओं के तालमेल और आधुनिक तकनीक आधारित युद्ध प्रणाली की प्रभावशीलता को साबित किया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में लेफ्टिनेंट जनरल जुबिन ए मिनवाला, लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती और वाइस एडमिरल एएन प्रमोद सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौजूद रहे।
‘ऑपरेशन सिंदूर केवल कार्रवाई नहीं, रणनीतिक संदेश था’
डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन एवं डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ राजीव घई ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया कि भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता अब केवल नीतिगत घोषणा नहीं, बल्कि वास्तविक सैन्य शक्ति बन चुकी है। उन्होंने बताया कि देश के 65 प्रतिशत से अधिक रक्षा उपकरण अब भारत में ही निर्मित हो रहे हैं और इन्हीं स्वदेशी संसाधनों का सफल उपयोग अभियान में किया गया।

उन्होंने कहा कि 7 मई 2025 को चलाए गए अभियान में भारतीय सेना ने सात और भारतीय वायुसेना ने दो प्रमुख लक्ष्यों को निशाना बनाया था। इस कार्रवाई में आतंकवादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा और बड़ी संख्या में आतंकियों व पाकिस्तानी सैन्य कर्मियों के मारे जाने की जानकारी सामने आई। राजीव घई ने कहा कि अभियान के बाद विरोधी पक्ष ने संघर्ष विराम की मांग की थी, जिसके बाद भारत ने सैन्य कार्रवाई रोकी, लेकिन अपनी रणनीतिक स्थिति कमजोर नहीं होने दी। उन्होंने दोहराया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ हर स्तर पर कार्रवाई जारी रखेगा।
‘शांति को कमजोरी समझा गया तो जवाब कठोर होगा’
एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों को वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए निर्णायक कदम आवश्यक थे। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य पूरी तरह स्पष्ट था और सेनाओं को पूर्ण ऑपरेशनल स्वतंत्रता प्रदान की गई थी।
उन्होंने कहा कि भारत हमेशा शांति और सह-अस्तित्व की नीति में विश्वास करता है, लेकिन यदि उसकी संयमित नीति को कमजोरी समझा जाएगा तो जवाब कठोर और प्रभावी होगा।
एयर मार्शल ने दावा किया कि अभियान के दौरान नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया, 11 एयरफील्ड को नुकसान पहुंचाया गया और 13 विमानों को मार गिराया गया। उन्होंने यह भी कहा कि लंबी दूरी की क्षमता का प्रदर्शन करते हुए एक एयर वार्निंग विमान को 300 किलोमीटर से अधिक दूरी से लक्ष्य बनाया गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सैन्य और नागरिक ढांचे को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंची और सभी हमलों को सफलतापूर्वक निष्प्रभावी किया गया।
‘पाकिस्तान को चीन से मिल रही रणनीतिक सहायता’
वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने कहा कि पाकिस्तान को चीन से अंतरिक्ष संसाधनों, खुफिया सूचनाओं, साइबर सहायता और हथियारों के क्षेत्र में सहयोग प्राप्त हो रहा है, जिसे भारत अपनी सैन्य रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानकर आकलन करता है।
उन्होंने बताया कि 6 और 7 मई की रात भारतीय नौसेना ने सेना और वायुसेना के साथ समन्वित कार्रवाई करते हुए आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमलों में भागीदारी निभाई। वाइस एडमिरल के अनुसार भारतीय नौसेना की अग्रिम तैनाती के कारण पाकिस्तान की नौसैनिक और वायु गतिविधियां सीमित हो गईं और उन्हें रक्षात्मक मुद्रा अपनाने पर मजबूर होना पड़ा।
AI आधारित डिफेंस स्ट्रैटजिक कम्युनिकेशन डिवीजन बनेगा
लेफ्टिनेंट जनरल जुबिन ए मिनवाला ने कहा कि एयर डिफेंस सिस्टम को और मजबूत करने के लिए IACCS और आकाशतीर जैसी आधुनिक प्रणालियों का एकीकरण किया गया है, जिससे हवाई गतिविधियों की समग्र निगरानी संभव हो सकी है।
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद इन नेटवर्क्स को और उन्नत बनाया गया है। साथ ही जल्द ही डिफेंस स्ट्रैटजिक कम्युनिकेशन डिवीजन स्थापित किया जाएगा, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों के माध्यम से रियल टाइम में दुष्प्रचार और फेक सूचना के खिलाफ काम करेगा।
तीनों सेनाओं के संयुक्त समन्वय का उदाहरण बना अभियान
वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया कि भारत आधुनिक युद्ध की चुनौतियों का सामना संयुक्त सैन्य क्षमता, तकनीकी दक्षता और सटीक रणनीति के साथ करने में सक्षम है। उन्होंने इसे आतंकवाद के खिलाफ भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण अध्याय बताया।

