बीबीएन, बीकानेर। सूबे में चल रहे ‘मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान’ के तहत प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में कमजोर प्रदर्शन करने वाले 175 सरकारी विद्यालय शिक्षा विभाग के निशाने पर आ गए हैं। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने प्रदेशभर के इन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब तलब किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ राजस्थान असैनिक सेवा नियम-1958 के तहत विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग की समीक्षा में सामने आया कि पिछले शैक्षणिक सत्र की तुलना में कई विद्यालयों में विद्यार्थियों के नामांकन में गंभीर गिरावट दर्ज हुई है। प्रवेशोत्सव अभियान चलने के बावजूद अपेक्षित संख्या में नए विद्यार्थियों का प्रवेश नहीं हो सका और ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा विद्यालयों से जोड़ने में भी कई संस्थान विफल रहे। इसी को प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए विभाग ने सख्त कदम उठाया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट द्वारा जारी आदेश में उल्लेख किया गया है कि 5 मार्च, 25 मार्च और 24 अप्रैल 2026 को भी विद्यालयों को नामांकन बढ़ाने और अभियान को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कई स्कूलों में स्थिति में सुधार नहीं हुआ। विभाग का मानना है कि अभियान की निगरानी और जनसंपर्क गतिविधियों में गंभीर कमी रही है।
सूची में प्रदेश के अनेक बड़े और चर्चित विद्यालय शामिल हैं। इनमें बाड़मेर का आदेल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, धौलपुर का पीएम श्री स्कूल बाड़ी, भरतपुर का पीएम श्री विद्यालय बयाना, जयपुर, जोधपुर, अजमेर, उदयपुर, कोटा, दौसा, सीकर और बीकानेर जिले के कई विद्यालय शामिल हैं। सबसे अधिक चौंकाने वाला मामला बाड़मेर जिले के आदेल विद्यालय का सामने आया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में यहां 779 विद्यार्थियों का नामांकन था, जबकि 10 मई 2026 तक विद्यालय में नामांकन शून्य दर्ज किया गया। इसी प्रकार धौलपुर के पीएम श्री स्कूल बाड़ी में 433 तथा भरतपुर के पीएम श्री स्कूल बयाना में 414 विद्यार्थियों की कमी दर्ज हुई है।
बीकानेर जिले के कई प्रतिष्ठित विद्यालय भी विभागीय कार्रवाई की जद में आए हैं। इनमें महारानी राजकीय बालिका विद्यालय, सदुल स्कूल, शहीद मेजर पूरणसिंह फोर्ट स्कूल, सेठ भेरूदान चोपड़ा विद्यालय और नाथूसर गेट विद्यालय सहित अन्य संस्थानों के नाम शामिल हैं। इन विद्यालयों में नामांकन में उल्लेखनीय गिरावट मिलने पर विभाग ने जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया है कि वे तीन दिन के भीतर ई-मेल के माध्यम से विस्तृत प्रगति रिपोर्ट और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। विभाग का कहना है कि प्रवेशोत्सव अभियान राज्य सरकार की प्राथमिकता से जुड़ा कार्यक्रम है और इसमें किसी भी स्तर की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


