नरेन्द्र आर्य |
बीबीएन,बीकानेर। खरीफ-2026 के दौरान सिंचाई जल की उपलब्धता को संतुलित बनाए रखने और नहर तंत्र के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने के उद्देश्य से इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आईजीएनपी) के लिए नया चक्रीय जल वितरण कार्यक्रम लागू कर दिया गया है। कार्यालय आयुक्त, सिंचित क्षेत्र विकास, बीकानेर द्वारा जारी आदेश के अनुसार 20 जून प्रातः 6 बजे से 15 जुलाई सायं 6 बजे तक नहरों का संचालन तीन समूहों की रोटेशन प्रणाली के आधार पर किया जाएगा। इस अवधि में जल संरक्षण, नियंत्रित वितरण, कम जल खपत वाली फसलों को प्रोत्साहन तथा सिंचाई व्यवस्था की सतत निगरानी पर विशेष जोर रहेगा।
तीन चरणों में होगा जल वितरण
निर्धारित कार्यक्रम के तहत नहर नेटवर्क को ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ समूहों में विभाजित किया गया है। 20 जून से 28 जून, 28 जून से 7 जुलाई तथा 7 जुलाई से 15 जुलाई तक तीन अलग-अलग चरणों में प्रत्येक समूह को क्रमवार पानी उपलब्ध कराया जाएगा। विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से उपलब्ध जल का अधिकतम उपयोग संभव होगा और टेल एरिया तक भी पर्याप्त प्रवाह बनाए रखा जा सकेगा।
जल उपलब्धता के अनुसार तय होगी सिंचाई रणनीति
जल संसाधन विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए ऐसी फसलों का चयन करें जिनमें अपेक्षाकृत कम पानी की आवश्यकता होती है। विभाग द्वारा जारी जल आवश्यकता मानकों के अनुरूप सिंचाई प्रबंधन करने पर बल दिया गया है, ताकि सीमित संसाधनों के बीच अधिकाधिक कृषि क्षेत्र को लाभ मिल सके।
बिना अनुमति नहीं बदलेगा संचालन कार्यक्रम
मुख्य अभियंता स्तर से स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि स्वीकृत रेगुलेशन कार्यक्रम में किसी भी प्रकार का संशोधन सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा। इससे जल वितरण प्रणाली में एकरूपता और पारदर्शिता बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।
निगरानी के लिए रहेगा प्रशासनिक तंत्र सक्रिय
जल वितरण व्यवस्था की नियमित समीक्षा के लिए जिला प्रशासन, सिंचाई विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां समन्वित रूप से कार्य करेंगी। किसानों की शिकायतों और तकनीकी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए क्षेत्रीय अधिशाषी अभियंताओं को नोडल जिम्मेदारी सौंपी गई है। आवश्यकता पड़ने पर राजस्व एवं पुलिस प्रशासन का सहयोग भी लिया जाएगा।
कमी की स्थिति में लागू होगा आनुपातिक बंटवारा
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित अवधि में जल उपलब्धता अपेक्षा से कम रहती है तो सभी क्षेत्रों में पानी का वितरण आनुपातिक आधार पर किया जाएगा। मसीतावाली हेड पर उपलब्ध प्रवाह के अनुसार परियोजना के विभिन्न हिस्सों में जल कटौती का भार भी समानुपातिक रूप से वहन कराया जाएगा।



