बीबीएन,बीकानेर | हिंद-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित खाजूवाला सेक्टर इन दिनों पाकिस्तानी साजिशों का नया ‘हॉटस्पॉट’ बन गया है। पंजाब सीमा पर सुरक्षा घेरा सख्त होने के बाद अब दुश्मन ने राजस्थान के रेतीले धोरों को हथियार और नशे की सप्लाई का नया रूट चुन लिया है। पिछले 5 सालों के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि खाजूवाला बॉर्डर पर आसमान से ‘मौत के सौदागरों’ की घुसपैठ बढ़ी है।
ड्रोन वाली साजिश: खेतों में गिर रहा बारूद और ‘ज़हर’
तस्करों की नई कार्यप्रणाली ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। जीपीएस से लैस पाकिस्तानी ड्रोन रात के अंधेरे में भारतीय सीमा में दाखिल होते हैं और चंद मिनटों में हेरोइन व हथियारों की खेप गिराकर फुर्र हो जाते हैं। हालिया कार्रवाई में 2.25 किलो हेरोइन की बरामदगी ने साफ कर दिया है कि सीमा पार बैठे आका इस रास्ते को अपना सुरक्षित ठिकाना मान चुके हैं।
5 साल का ‘खौफनाक’ हिसाब-किताब:
हेरोइन: 6 किलोग्राम से अधिक (बाजार कीमत करोड़ों में)
हथियार: 5 विदेशी पिस्तौल बरामद।
कारतूस: 325 राउंड का जखीरा जब्त।
गिरफ्तारी: तस्करी नेटवर्क से जुड़ा एक गुर्गा कुलवंत सिंह सलाखों के पीछे।
क्यों ‘सॉफ्ट टारगेट’ बना खाजूवाला?
सुरक्षा विश्लेषकों की मानें तो खाजूवाला की भौगोलिक बनावट तस्करों के लिए सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है। पंजाब में कड़े पहरे और आधुनिक रडार तकनीक के कारण वहां ड्रोन उड़ाना अब तस्करों के लिए सुसाइड मिशन जैसा हो गया है, इसलिए उन्होंने राजस्थान के कम आबादी वाले इलाकों की ओर रुख किया है।
रेतीले धोरों की ओट:
दूर-दूर तक फैले खेत और ढाणियां ड्रोन से पैकेट ड्रॉप करने के लिए सटीक लैंडिंग ग्राउंड प्रदान करते हैं।
सड़क मार्ग का जाल: बीकानेर से हरियाणा और पंजाब के लिए सीधा रोड नेटवर्क है, जिससे नशे की खेप को ठिकाने लगाना आसान होता है।
बदली रणनीति: पंजाब बॉर्डर पर बीएसएफ की मारक क्षमता बढ़ने के बाद तस्कर अब ‘कम निगरानी’ वाले इलाकों को टेस्ट कर रहे हैं।
BSF की हुंकार: नापाक मंसूबों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तैयारी
बीएसएफ और राजस्थान पुलिस अब ‘ज्वाइंट ऑपरेशन’ के जरिए तस्करों की कमर तोड़ने में जुटी है। सीमा पर थर्मल इमेजिंग, हाई-टेक रडार और एंटी-ड्रोन गन की तैनाती बढ़ा दी गई है। सरहदी गांवों में ‘विलेज डिफेंस कमेटियों’ को सक्रिय कर दिया गया है ताकि आसमान में उड़ते किसी भी ‘संदिग्ध परिंदे’ की सूचना तुरंत मिल सके।





