बीबीएन, नेटवर्क। राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक संगठित रैकेट का भंडाफोड़ किया, जो विदेश से MBBS कर लौटे छात्रों को लाखों रुपये लेकर फर्जी FMGE पास सर्टिफिकेट, NMC रजिस्ट्रेशन और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप मुहैया करा रहा था। इस गिरोह की मदद से दौसा जिले के तीन युवकों पीयूष त्रिवेदी, शुभम गुर्जर और देवेंद्र सिंह गुर्जर ने बिना परीक्षा पास किए सरकारी अस्पतालों में इंटर्नशिप तक पूरी कर ली, जिससे मरीजों की सुरक्षा और मेडिकल सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूचना के बाद SOG ने गहन जांच की तो पता चला कि आरोपी विदेश से MBBS करने वाले ऐसे छात्रों को निशाना बनाते थे जो FMGE परीक्षा बार–बार पास करने में असफल हो रहे थे। दलालों और नेटवर्क संचालकों की मिलीभगत से तैयार फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इन युवकों को राजस्थान के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप का आवंटन मिल गया।
जांच में सामने आया कि पीयूष त्रिवेदी ने 2020 में जॉर्जिया से MBBS पूरा किया था, लेकिन 2022, 2023 और 2024 में लगातार तीन बार FMGE परीक्षा में फेल हुआ। इसके बाद उसने गिरोह से संपर्क किया, जिसने करीब 16 लाख रुपये लेकर फर्जी FMGE सर्टिफिकेट और NMC रजिस्ट्रेशन तैयार कर दिया। इसी नेटवर्क की मदद से शुभम गुर्जर और देवेंद्र सिंह गुर्जर ने भी सरकारी मेडिकल संस्थानों में इंटर्नशिप कर ली।
एजेंसी को आशंका है कि इस रैकेट की जड़ें राजस्थान से बाहर कई अन्य राज्यों तक फैली हो सकती हैं, जहां दलाल, दस्तावेज तैयार करने वाले और इस नेटवर्क से लाभ लेने वाले युवाओं की पहचान की जा रही है। SOG का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर और भी चेहरे सामने आ सकते हैं। इस पूरे मामले ने राज्य में मेडिकल शिक्षा प्रणाली, सत्यापन प्रक्रिया और अस्पतालों में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एजेंसी ने कहा है कि ऐसी घटनाओं ने यह आवश्यकता फिर रेखांकित की है कि चिकित्सा क्षेत्र में प्रमाणिकता और सत्यापन के तंत्र को और मजबूत किया जाए।
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