⭕ सेना को बताया जीवन मूल्यों की पाठशाला
बीबीएन, नेटवर्क | जयपुर स्थित पूर्णिमा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उस वक्त राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यबोध का स्वर गूंज उठा, जब सप्त शक्ति कमांड के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपनी शिक्षा, ऊर्जा और प्रतिभा को केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित न रखें, बल्कि देशहित को अपने जीवन का उद्देश्य बनाएं।
सेना सिर्फ नौकरी नहीं, जीवन दर्शन
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए आर्मी कमांडर ने कहा कि भारतीय सेना महज़ एक करियर विकल्प नहीं, बल्कि ऐसा जीवन मार्ग है जहाँ अनुशासन, समर्पण, नेतृत्व और टीमवर्क हर कदम पर व्यक्ति का चरित्र गढ़ते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ‘सेवा परमो धर्म’ केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि भारतीय सेना की आत्मा है, जो हर सैनिक को राष्ट्र के प्रति जवाबदेह बनाती है।
युवाओं के कंधों पर देश का भविष्य
लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने स्नातक छात्रों को याद दिलाया कि आज का भारत तेजी से बदल रहा है और इस बदलाव की दिशा तय करने की जिम्मेदारी युवाओं पर है। उन्होंने कहा कि उच्च नैतिकता, ईमानदारी और जिम्मेदारी के बिना कोई भी राष्ट्र मजबूत नहीं बन सकता। छात्रों से उन्होंने आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्टता के साथ देश के प्रति निष्ठा बनाए रखें।
विश्वविद्यालयों की भूमिका सराही
आर्मी कमांडर ने पूर्णिमा विश्वविद्यालय द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने के प्रयासों की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षण संस्थान ही भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर सकते हैं।
सिविल–मिलिट्री सहयोग पर जोर
अपने संबोधन में उन्होंने सेना और शिक्षा जगत के बीच मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों और सशस्त्र बलों का संवाद राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मंच युवाओं को सेना में करियर के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ देशभक्ति की भावना को भी सशक्त करते हैं।


