बीबीएन, नेटवर्क। सप्त शक्ति कमांड के तत्वावधान में जयपुर मिलिट्री स्टेशन में “ईरान युद्ध एवं उसके भू-राजनीतिक प्रभाव” विषय पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें सैन्य अधिकारियों, पूर्व सैनिकों, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में पूर्व वायुसेना प्रमुख आर.के.एस. भदौरिया सहित विदेश नीति और पश्चिम एशिया मामलों के विशेषज्ञ पूर्व राजनयिकों ने युद्ध के सामरिक, आर्थिक और कूटनीतिक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। सेमिनार में आधुनिक युद्धों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एयर पावर, नेतृत्व पर हमले और बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन जैसे अहम विषय केंद्र में रहे।
ज्ञान शक्ति थिंक टैंक द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य रक्षा और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े गंभीर विषयों पर सार्थक विमर्श को बढ़ावा देना था। सेमिनार में बड़ी संख्या में सेवारत अधिकारी, पूर्व सैनिक, विश्वविद्यालयों के शिक्षाविद और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने पश्चिम एशिया की भौगोलिक संवेदनशीलता, क्षेत्रीय इतिहास और संघर्षरत देशों की रणनीतिक सोच का विश्लेषण किया। वक्ताओं ने कहा कि ईरान युद्ध जैसे संघर्ष केवल सीमित क्षेत्र तक प्रभाव नहीं डालते, बल्कि इनका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों और भविष्य की विश्व व्यवस्था पर भी पड़ता है।
चर्चा में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और वैश्विक गठबंधनों की सीमाओं पर भी विचार रखा गया। विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान संघर्षों में केवल पारंपरिक सैन्य शक्ति ही नहीं, बल्कि तकनीक आधारित युद्धक रणनीतियां तेजी से प्रभावी हो रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, एयर स्ट्राइक क्षमता और साइबर डोमेन ने युद्ध की प्रकृति को व्यापक रूप से बदल दिया है। समापन सत्र में लेफ्टिनेंट जनरल पी.एस. शेखावत ने वक्ताओं के विचारों को समकालीन वैश्विक परिदृश्य के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने आधुनिक युद्धों से उत्पन्न नए खतरों, आर्थिक निर्भरताओं के रणनीतिक उपयोग और बदलते अंतरराष्ट्रीय शक्ति केंद्रों पर भी प्रकाश डाला।
ज्ञान शक्ति थिंक टैंक नवंबर 2024 से अब तक कई रणनीतिक विषयों पर 13 सेमिनार आयोजित कर चुका है। यह मंच पूर्व सैनिकों और विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक अध्ययन और वैश्विक चुनौतियों पर बौद्धिक संवाद को प्रोत्साहित कर रहा है।




