बीबीएन, नेटवर्क। राष्ट्रीय कुम्हार महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक और नवनियुक्त पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण समारोह में समाज के चहुंमुखी विकास, राजनीतिक भागीदारी और शिक्षा को बढ़ावा देने जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। राजधानी दिल्ली के एक होटल सभागार में आयोजित इस सम्मेलन में देशभर से आए पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा संगठन को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
सम्मेलन की अध्यक्षता दीपचंद प्रजापति ने की। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी, विभिन्न राज्यों के प्रदेशाध्यक्ष, महासचिव, जिलाध्यक्ष और समाज के गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में विशेष रूप से सामाजिक एकता, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने और संगठन के विस्तार पर जोर दिया गया।
राष्ट्रीय प्रवक्ता दिनेश संवाल के अनुसार, सम्मेलन में नई दिल्ली में कुम्हार समाज के लिए बहुमंजिला भवन और छात्रावास निर्माण का प्रस्ताव प्रमुख रहा। इस भवन में युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क तैयारी की व्यवस्था की जाएगी, साथ ही बाहर से आने वाले विद्यार्थियों के लिए आवास सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। लगभग पांच करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस भवन के लिए विभिन्न राज्यों से आर्थिक सहयोग मिल रहा है, जिसमें गुजरात और राजस्थान अग्रणी हैं। बीकानेर के समाजजनों ने भी अब तक तीन लाख रुपये का योगदान दिया है।
राष्ट्रीय मुख्य महासचिव डूंगरमल प्रजापत ने अपने संबोधन में समाज में शिक्षा, विशेषकर बालिकाओं की शिक्षा को प्राथमिकता देने और संगठनात्मक एकजुटता पर बल दिया। वहीं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सोहनलाल प्रजापत ने राजनीतिक क्षेत्र में समाज की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता जताई और स्पष्ट किया कि जो दल समाज को उचित प्रतिनिधित्व देगा, उसे समर्थन देने पर विचार किया जाएगा।
राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष अलकाबेन प्रजापति ने महिलाओं से आगे आकर नेतृत्व संभालने और राष्ट्रीय महिला कार्यकारिणी में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान डूंगरमल प्रजापत ने नवनियुक्त पदाधिकारियों और सदस्यों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। उन्होंने बताया कि महासभा की सक्रिय उपस्थिति देश के 18 राज्यों में है और संगठन लगातार विस्तार की दिशा में कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम में सुग्रीव पंडित, सुभाष चंद्र मंगलराव, अरुण कुमार प्रजापति, संतोष कुमार प्रजापति, महेश पंडित, लक्ष्मण कुंभार, मोहनलाल प्रजापति, गजानंद कोमलकर, अनिल भाई प्रजापति सहित कई राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त किए। राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र समेत विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में पदाधिकारी शामिल हुए। सम्मेलन में समाज के उत्थान, शिक्षा के प्रसार और संगठित शक्ति के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव बढ़ाने का संकल्प लिया गया।



