बीबीएन, नेटवर्क | जयपुर मिलिट्री स्टेशन में सप्त शक्ति कमांड के तत्वावधान में आयोजित एक महत्वपूर्ण सेमिनार में ‘Redlines Redrawn – Operation Sindoor and India’s New Normal’ पुस्तक पर व्यापक चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ रक्षा अधिकारी, पूर्व सैन्य अधिकारी, कूटनीतिक विशेषज्ञ, शिक्षाविद और बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए। चर्चा के दौरान ऑपरेशन सिंदूर की 88 घंटे की रणनीतिक कार्रवाई, उसके परिणाम और भारत की बदलती सुरक्षा नीति पर विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया।
ऑपरेशन सिंदूर: रणनीतिक बदलाव की नई दिशा
सेमिनार में पुस्तक के सह-लेखकों मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) बिपिन बख्शी, पूर्व राजदूत अनिल त्रिगुणायत और ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) अखिलेश भार्गव ने भाग लिया। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत की नई रणनीतिक सोच का संकेत है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि इस ऑपरेशन के माध्यम से भारत ने सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति को और अधिक सख्त और प्रभावी बनाया है। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे इस कार्रवाई ने दुश्मन पक्ष के लिए लागत और जोखिम को बढ़ाया।
पुस्तक के आठ अध्यायों में व्यापक विश्लेषण
चर्चा के दौरान लेखकों ने पुस्तक के आठों अध्यायों का क्रमवार विश्लेषण प्रस्तुत किया। इसमें सैन्य रणनीति, कूटनीतिक दबाव, राजनीतिक निर्णय और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव जैसे प्रमुख पहलुओं को विस्तार से समझाया गया। सेमिनार में उपस्थित प्रतिभागियों ने प्रश्न-उत्तर सत्र में सक्रिय भागीदारी की, जिससे चर्चा और अधिक प्रभावी और संवादात्मक बनी।
ज्ञान शक्ति थिंक टैंक की पहल
ज्ञान शक्ति थिंक टैंक द्वारा नवंबर 2024 से अब तक विभिन्न समकालीन विषयों पर 11 से अधिक सेमिनार आयोजित किए जा चुके हैं। इस मंच का उद्देश्य रक्षा और रणनीतिक मामलों पर बौद्धिक विमर्श को बढ़ावा देना है। यह मंच विशेष रूप से सैन्य वेटरन्स, विशेषज्ञों और युवाओं के बीच विचारों के आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है।
समापन में रणनीतिक दृष्टिकोण पर जोर
कार्यक्रम के समापन अवसर पर सप्त शक्ति कमान के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल पी.एस. शेखावत ने वक्ताओं के विचारों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के विमर्श राष्ट्रीय सुरक्षा के बहुआयामी पहलुओं को समझने में सहायक होते हैं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की राजनीतिक, सैन्य और कूटनीतिक क्षमता को नए रूप में परिभाषित किया है और इस पर गंभीर अध्ययन आवश्यक है।




