बीबीएन, नेटवर्क। जिला अदालत ने 9 साल पुराने एक जघन्य मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सीमा सुरक्षा बल (BSF) के दो जवानों को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने साल 2017 में एक स्थानीय आदिवासी महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उस पर एसिड हमला करने के मामले में दोनों दोषियों को कुल 42 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। आइजोल की अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश सिल्वी जोमुआनपुई राल्ते ने यह अहम फैसला सुनाया।
क्या था पूरा मामला?
घटना 16 जुलाई 2017 की है। पीड़ित महिला अपनी एक सहेली के साथ भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित ममित जिले में गस्काटा नदी के पास जंगल में गई थी। इसी दौरान स्थानीय बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) पर तैनात BSF जवान नीलांजन दास और दिनेश कुमार ने दोनों को घेर लिया। जवानों ने एक महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और अपनी पहचान छिपाने तथा पीड़िता को अंधा करने की नीयत से उसके चेहरे पर एसिड फेंक दिया।
सहेली की संदिग्ध मौत, पर हत्या के सबूत नहीं
इस भयानक हमले में पीड़िता किसी तरह जान बचाने में कामयाब रही, लेकिन उसने हमेशा के लिए अपना चेहरा और आंखों की रोशनी खो दी। घटना के दौरान लापता हुई उसकी सहेली का शव 11 दिन बाद जंगल से बुरी तरह सड़ी-गली अवस्था में मिला था। अभियोजन पक्ष ने उसे हत्या का मामला साबित करने की कोशिश की, लेकिन ठोस सबूतों के अभाव में अदालत ने दोनों जवानों को हत्या के आरोपों से बरी कर दिया।
NHRC के हस्तक्षेप के बाद मिली सफलता
दोषियों तक पहुंचना आसान नहीं था। शुरुआती जांच के दौरान राज्य पुलिस को BSF के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। अधिकारियों ने जवानों की गिरफ्तारी और DNA जांच के लिए बायोलॉजिकल सैंपल देने का विरोध किया था। इसके बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दखल के बाद जांच आगे बढ़ सकी। बॉर्डर आउटपोस्ट के आधिकारिक ड्यूटी रोस्टर से स्पष्ट हुआ कि घटना के समय दोनों जवान वहीं तैनात थे। आइजोल में आयोजित ‘टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड’ में पीड़िता ने दोनों को पहचान लिया।
42 साल की सजा और जुर्माना
कोर्ट ने 18 गवाहों के बयानों और फुल्डुंगसेई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अपना फैसला सुनाया। भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत दोनों जवानों को सजा मिली है।




