फ़िरोज़पुर से नरेंद्र आर्य ओर लखविंदर सिंह की रिपोर्ट
बीबीएन, नेटवर्क । पंजाब और हिमाचल प्रदेश के प्रमुख जलाशयों पौंग डैम, भाखड़ा डैम और रंजीत सागर (थीन) डैम से मंगलवार सुबह जारी जल प्रवाह के आंकड़ों के अनुसार तीनों बांधों से निकासी, आवक की तुलना में अधिक बनी हुई है। वहीं हरिके हेडवर्क्स पर 24,471 क्यूसेक पानी पहुंचा, जिसमें से राजस्थान फीडर को 12,045 क्यूसेक तथा फिरोजपुर फीडर को 11,048 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। यह स्थिति उत्तर भारत के सिंचाई नेटवर्क के लिए राहत भरी मानी जा रही है, खासकर खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच राजस्थान और पंजाब के कृषि क्षेत्रों को पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है।
भाखड़ा डैम से सबसे अधिक जल निकासी
सतलुज नदी पर स्थित भाखड़ा डैम का जलस्तर मंगलवार सुबह 6 बजे 1573.56 फीट दर्ज किया गया। यहां 17,256 क्यूसेक पानी की आवक हुई, जबकि 29,108 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। आवक की तुलना में अधिक निकासी से संकेत मिलता है कि जलाशय प्रबंधन एजेंसियां मानसून से पहले भंडारण क्षमता को संतुलित बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही हैं।
पौंग डैम में जलस्तर 1324.35 फीट
ब्यास नदी पर बने महाराणा प्रताप सागर (पौंग डैम) में सुबह 6 बजे जलस्तर 1324.35 फीट रिकॉर्ड किया गया। डैम में 2,434 क्यूसेक पानी की आवक हुई, जबकि 11,003 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। वर्तमान में जलाशय में नियंत्रित जल निकासी जारी है, जिससे डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में जल उपलब्धता बनी हुई है।
रंजीत सागर डैम से 12,413 क्यूसेक पानी छोड़ा गया
रावी नदी पर बने रंजीत सागर (थीन) डैम का जलस्तर 508.470 मीटर (1668.20 फीट) दर्ज किया गया। यहां 4,383 क्यूसेक पानी की आवक के मुकाबले 12,413 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसके अलावा रावी से ब्यास नदी की ओर औसतन 3,750 क्यूसेक पानी का डायवर्जन भी जारी है, जो क्षेत्रीय जल संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
हरिके हेडवर्क्स से राजस्थान को बड़ी हिस्सेदारी
हरिके हेडवर्क्स पर जलस्तर 690.90 फीट दर्ज किया गया। यहां अपस्ट्रीम से 24,471 क्यूसेक पानी पहुंचा। इस पानी का वितरण निम्नानुसार किया गया—
राजस्थान फीडर : 12,045 क्यूसेक
फिरोजपुर फीडर : 11,048 क्यूसेक
मखू नहर : 272 क्यूसेक
डाउनस्ट्रीम प्रवाह : 1,106 क्यूसेक
राजस्थान फीडर को कुल उपलब्ध पानी का लगभग आधा हिस्सा मिलने से गंगानगर, हनुमानगढ़ और आसपास के सिंचित क्षेत्रों को लाभ मिलने की संभावना है।
खरीफ फसलों के लिए सकारात्मक संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार जून के मध्य में जलाशयों से नियंत्रित जल निकासी और पर्याप्त नहर प्रवाह खरीफ सीजन के लिए सकारात्मक संकेत हैं। धान, कपास, ग्वार और अन्य फसलों की बुवाई के समय सिंचाई जल उपलब्धता किसानों के लिए महत्वपूर्ण होती है। राजस्थान फीडर और फिरोजपुर फीडर में वर्तमान प्रवाह आगामी दिनों में कृषि गतिविधियों को गति दे सकता है।
मानसून से पहले जल प्रबंधन की रणनीति
उत्तर भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति को देखते हुए जल संसाधन एजेंसियां जलाशयों में पर्याप्त भंडारण क्षमता बनाए रखने पर जोर दे रही हैं। यही कारण है कि कई बांधों से आवक से अधिक पानी छोड़ा जा रहा है। यदि आने वाले दिनों में मानसूनी वर्षा बढ़ती है तो जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो सकती है, जिससे सिंचाई और पेयजल आपूर्ति व्यवस्था और मजबूत होगी।
प्रमुख आंकड़े एक नजर में
जलाशय/हेडवर्क्स
जलस्तर
आवक (क्यूसेक)
निकासी (क्यूसेक)
पौंग डैम
1324.35 फीट
2,434
11,003
भाखड़ा डैम
1573.56 फीट
17,256
29,108
रंजीत सागर डैम
1668.20 फीट
4,383
12,413
हरिके हेडवर्क्स
690.90 फीट
24,471
वितरण अनुसार





