बलजीत गिल. | बीबीएन, बीकानेर । पाकिस्तान सीमा से सटे बीकानेर सेक्टर में जल्द ही सुरक्षा व्यवस्था का नया दौर शुरू होने जा रहा है। वर्षों पुरानी हो चुकी तारबंदी की जगह अब तकनीक आधारित निगरानी तंत्र विकसित किया जाएगा। केंद्र सरकार ने पहले चरण में 119 किलोमीटर क्षेत्र को स्मार्ट फेंसिंग नेटवर्क से जोड़ने की मंजूरी दी है। इसके तहत ड्रोन, रडार, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक अलर्ट सिस्टम और हाईटेक वॉच टावरों की मदद से सीमा पर हर गतिविधि पर चौबीसों घंटे नजर रखी जाएगी। हाल में गृह मंत्री अमित शाह के सीमावर्ती क्षेत्रों के दौरों के बाद इस योजना को गति मिली है, जिसे देश की सीमा सुरक्षा में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
बीकानेर से लेकर बंगाल तक बदलेगा सुरक्षा मॉडल
केंद्र सरकार ने सीमा सुरक्षा के मौजूदा ढांचे का व्यापक आकलन करने के बाद तकनीक आधारित मॉडल अपनाने का निर्णय लिया है। पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा के कई हिस्सों में दशकों पहले लगाई गई फेंसिंग अब अपनी उपयोगिता खो रही है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां भौतिक अवरोधों के साथ डिजिटल निगरानी प्रणाली को जोड़ने की तैयारी कर रही हैं।
सात-आठ संवेदनशील क्षेत्रों में होगा परीक्षण
योजना के तहत अगले एक वर्ष के भीतर देश के विभिन्न सीमावर्ती इलाकों में सात से आठ पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे। इन परियोजनाओं का उद्देश्य अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में स्मार्ट बॉर्डर सिस्टम की प्रभावशीलता का परीक्षण करना है। सफल परिणाम मिलने पर इसे अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में भी विस्तार दिया जाएगा।
गांवों से भी मिलेगी सुरक्षा एजेंसियों को सूचना
नई व्यवस्था की खास बात यह होगी कि सीमा सुरक्षा को केवल बीएसएफ की चौकियों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। स्थानीय प्रशासन, पुलिस, राजस्व विभाग और सीमावर्ती गांवों के जनप्रतिनिधियों को भी सूचना तंत्र का हिस्सा बनाया जाएगा। इससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तेजी से संबंधित एजेंसियों तक पहुंच सकेगी।
ड्रोन से लेकर सेंसर तक बनेगा डिजिटल सुरक्षा घेरा
सुरक्षा ग्रिड में ऐसे उपकरण लगाए जाएंगे जो रात, धुंध या प्रतिकूल मौसम में भी गतिविधियों का पता लगाने में सक्षम होंगे। सेंसर नेटवर्क सीमा क्षेत्र में किसी भी असामान्य हलचल की पहचान करेगा, जबकि रडार और ड्रोन निगरानी प्रणाली दूरस्थ क्षेत्रों पर भी नजर रखेगी। रीयल टाइम अलर्ट मिलने से सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज होगी।
तस्करी के बदलते तरीकों पर फोकस
हाल के वर्षों में सीमा पार से ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थ, हथियार और अन्य प्रतिबंधित सामग्री भेजने की घटनाएं बढ़ी हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नई तकनीक इन चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद करेगी।
2047 के विजन से जुड़ी रणनीति
केंद्र सरकार सीमा प्रबंधन को राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास से जोड़कर देख रही है। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और तकनीक-सक्षम बनाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। इसके लिए आने वाले वर्षों में सीमा सुरक्षा बलों को अत्याधुनिक संसाधनों से लैस करने की योजना बनाई गई है।



