⭕ सरहद से 40 किमी पर सामरिक शक्ति का नया केंद्र
बलजीत गिल.
बीबीएन, बीकानेर | भारत–पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा को राष्ट्रीय सुरक्षा और मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। लालगढ़ सैन्य स्टेशन से सटी लगभग 525 बीघा भूमि पर अत्याधुनिक नया एयरबेस विकसित किया जाएगा। जो राजस्थान का छठा एयरबेस होगा,इसके निर्माण से पश्चिमी सीमा पर भारतीय वायुसेना की निगरानी, त्वरित कार्रवाई और हवाई ऑपरेशंस की क्षमता में करीब तीन गुना इजाफा होने का आकलन है। यह परियोजना सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
प्रस्तावित एयरबेस सादुलशहर तहसील क्षेत्र में विकसित होगा, जो सीमा से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस स्थान से एयर पेट्रोलिंग, रैकी, सर्विलांस और आपातकालीन अभियानों को पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी और प्रभावशीलता के साथ अंजाम दिया जा सकेगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बेस पश्चिमी मोर्चे पर भारत की वायु सुरक्षा रणनीति का अहम स्तंभ बनेगा।
कानूनी बाधा समाप्त, परियोजना को हरी झंडी
भूमि अधिग्रहण को लेकर दायर याचिकाओं पर राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए परियोजना के पक्ष में निर्णय दिया है। अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट्स में सार्वजनिक हित सर्वोपरि होता है। न्यायालय के फैसले के बाद अब एयरबेस निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
अधिकारियों के अनुसार, अधिग्रहित भूमि के बदले पात्र किसानों को न्यायसंगत मुआवजा देने की प्रक्रिया को भी अंतिम रूप दिया जा चुका है। इससे लंबे समय से चल रहे विवाद का समाधान हुआ है और क्षेत्र में विकास व सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित हुआ है।
राजस्थान में वायुसेना की बढ़ती मौजूदगी
यह नया एयरबेस श्रीगंगानगर जिले में वायुसेना का दूसरा प्रमुख ठिकाना होगा। इससे पहले सूरतगढ़ एयरफोर्स स्टेशन पहले से ही सक्रिय है। दोनों ठिकानों के समन्वय से सीमावर्ती क्षेत्रों में हवाई निगरानी नेटवर्क और मजबूत होगा।
रणनीतिक संतुलन और क्षेत्रीय सुरक्षा
नए एयरबेस के चालू होने के बाद न केवल राजस्थान बल्कि पूरे पश्चिमी सेक्टर में भारत की हवाई सुरक्षा व्यवस्था को नई धार मिलेगी। इससे सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा भरोसा बढ़ेगा और किसी भी संभावित चुनौती का त्वरित और प्रभावी जवाब देना संभव होगा।


