बीबीएन, नेटवर्क। भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने उत्तरी कमान के अपने पहले आधिकारिक तीन दिवसीय दौरे का समापन करते हुए कश्मीर घाटी, नियंत्रण रेखा (LoC) और संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक आकलन किया।
7 से 9 जुलाई तक चले इस दौरे में उन्होंने आतंकवाद-रोधी अभियानों, सैनिकों की युद्धक तैयारियों, अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा, स्वदेशी सैन्य तकनीकों के उपयोग तथा स्थानीय समुदायों के साथ सेना के समन्वय कार्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा की। सेना प्रमुख ने सभी सैन्य रैंकों से हर परिस्थिति के लिए मिशन-रेडी, तकनीकी रूप से सक्षम और ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया।
कश्मीर से राजौरी तक सुरक्षा हालात का लिया फीडबैक
सेना प्रमुख ने उत्तरी कमान के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठकें कर कश्मीर घाटी, कुपवाड़ा, उरी, मानसबल, पुंछ, राजौरी और सुंदरबनी सहित संवेदनशील क्षेत्रों की मौजूदा सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। इस दौरान सीमा पर तैनात सैन्य इकाइयों की परिचालन क्षमता और रणनीतिक तैयारियों का भी मूल्यांकन किया गया।
आतंकवाद-रोधी अभियान और LoC पर विशेष फोकस
दौरे के दौरान नियंत्रण रेखा पर तैनात सैनिकों की तैयारियों, आतंकवाद-रोधी अभियानों की प्रगति और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा प्रबंधन की विस्तार से समीक्षा की गई। सेना प्रमुख ने बदलती सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप सतर्कता बनाए रखने पर जोर दिया।
अमरनाथ यात्रा सुरक्षा और स्वदेशी तकनीक पर चर्चा
जनरल धीरज सेठ ने श्री अमरनाथ यात्रा के लिए किए गए सुरक्षा इंतजामों का भी जायजा लिया। साथ ही स्वदेशी रक्षा तकनीकों के बढ़ते उपयोग, आधुनिक सैन्य प्रणालियों और सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रमों की प्रगति पर अधिकारियों से जानकारी ली।
सैनिकों के पेशेवर प्रदर्शन की सराहना
सेना प्रमुख ने भारतीय सेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs) के जवानों की पेशेवर दक्षता की प्रशंसा करते हुए कहा कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तकनीकी रूप से सक्षम, अनुशासित और सदैव मिशन-रेडी रहना आवश्यक है।






