बीबीएन, नेटवर्क। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन को वापस लेने का ऐलान कर दिया है।
CJP के प्रतिनिधियों ने कहा कि केंद्र सरकार के साथ हुई बातचीत में संगठन की प्रमुख मांगों पर सहमति बनी है। इसके बाद प्रदर्शनकारियों से तत्काल प्रभाव से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन समाप्त कर घर लौटने की अपील की गई।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों सौरव दास और आशुतोष रांका से तीसरे दौर की बातचीत की। यह बैठक करीब डेढ़ से दो घंटे तक चली।
‘सरकार ने हमारी सभी मांगें मान लीं’
कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत के बाद संगठन की सभी प्रमुख मांगों पर सहमति बनी है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे तुरंत प्रभाव से अपना प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त कर दें। CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संगठन अच्छे विश्वास के साथ आंदोलन वापस ले रहा है और उसे उम्मीद है कि बातचीत में तय की गई शर्तों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाएगा।
NEET से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता का आश्वासन
CJP के मुताबिक, बातचीत के दौरान NEET विवाद से प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक मुआवजे की मांग भी उठाई गई। संगठन ने प्रत्येक प्रभावित परिवार को ₹1 करोड़ मुआवजा देने की मांग रखी थी। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि NEET से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को नियमों और कानून के तहत आर्थिक सहायता दी जाएगी।
शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की मांग
CJP ने सरकार के सामने शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़ा पांच सूत्रीय मांग पत्र भी रखा है। संगठन का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए व्यापक सुधार जरूरी हैं। CJP के प्रवक्ताओं के अनुसार, इन मांगों पर आगे की चर्चा के लिए करीब चार सप्ताह बाद सरकार के साथ फिर बैठक की जाएगी। संगठन ने संकेत दिया है कि सरकार द्वारा तय मांगों पर कार्रवाई की प्रगति के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा बना आंदोलन की सबसे बड़ी मांग
NEET परीक्षा विवाद और परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और जवाबदेही की मांग में बदल गया। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा CJP की प्रमुख मांगों में शामिल था। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन वापस लेने का फैसला CJP के लिए एक बड़ी राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, अब आंदोलन की सफलता का वास्तविक आकलन सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों पर होने वाली कार्रवाई से होगा।






